रेलबस का बंद होना धर्मनगरी के विकास में बड़ी बाधा हो सकता है। जहां विकास के आधार बढ़ाने की बात होने चाहिए वहां यह नगर मूलभूत सुविधाएं भी खोता जा रहा है। वृंदावन रेलवे स्टेशन को ही देखिए। रेलवे को करोड़ों का राजस्व देने वाला यह स्टेशन रेलबस सेवा बंद होने के बाद से वीरान है। पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं भी यहां नहीं हैं। केवल असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है।
वृंदावन रेलवे स्टेशन की स्थिति इन दिनों उस दुधारू गाय की तरह है, जिसका दोहन तो हो रहा है लेकिन देखभाल कुछ भी नहीं है। रेलबस सेवा बंद होना इसका प्रमुख कारण है। अब यह स्टेशन रेलवे के लिए केवल आय अर्जित करने का जरिया है। वृंदावन रेलवे स्टेशन से प्रतिमाह 50 से 60 लाख के रिजर्वेशन टिकट बुक होते हैं।
60 से अधिक दैनिक यात्रियों की एमएसटी बनाई जाती है। रेलबस बंद होने के बाद यात्रियों का आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। जिससे स्टेशन मूलभूत सुविधाओं से महरूम है। पीने का पानी और कैंटीन तो है ही नहीं, शौचालय और यात्रियों के बैठने की बेंच भी जर्जर हो चुकी हैं।
विकास की उम्मीद भी नहीं की जा सकती क्योंकि इनकी दीवारों पर अनसेफ और एबंडंड (अनाथ) लिखा दिखाई देता है। टिनशेड और खंभे गिरासू हो चुके हैं। देखभाल के लिए केवल एक सुरक्षाकर्मी की तैनाती रहती है। अब स्टेशन असामाजिक तत्व और आवारा पशुओं के लिए पनाहगाह है। स्टेशन मास्टर पवन कुमार भी मानते हैं कि रेल बस के बंद होने से समस्याएं बढ़ी हैं लेकिन उनका कहना है कि इसके संबंध में अधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत करा दिया है।