नंदबाबा की कोषस्थली कोसी श्रीराधारानी ब्रज चौरासी कोस यात्रा के पदयात्रियों को खूब भा रही है। मंगलवार को संत रमेश बाबा के निर्देशन में यात्रियों ने नगला हसनपुर और आसपास के धार्मिक स्थलों के दर्शन किए।
इस दौरान गांववासी यात्रियों के स्वागत को उमड़ पड़े। एक ओर राधे नाम जपने वाले थे तो दूसरी ओर श्रीजी के भक्तों के स्वागत में पलकें बिछाए लोग। जहां भी यात्रा पहुंचती माहौल राधेमय हो जाता।
मंगलवार को चमेलीवन से यात्रा शुरू करने के बाद यात्रियों ने हताना, शेषशायी, नंदनवन, खरौट में पौराणिक स्थलों के दर्शन किए। राधे-कृष्ण, राधे-कृष्ण की धुनों पर यात्री नृत्य करते हुए सभी को मोह रहे थे।
संत रमेश बाबा ने पड़ाव के दौरान कहा कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य ब्रज की लीला स्थलियों और यमुना की रक्षा करना है। भजन केवल माला लेकर जप करना नहीं है। भगवान और उनके धाम से जुड़ना ही भजन है। यमुना जो कि 140 किलोमीटर तक प्रवाह हीन कर दी गई है।
दिल्ली की सारी गंदगी यमुना में प्रवाहित हो रही है। इससे श्रद्धालु यमुना में आचमन लेने से कतरा रहे हैं। हम सभी को यमुना को प्रदूषण से मुक्त कराने का संकल्प लेना होगा, तभी पतित पावन यमुना निर्मल हो सकेगी।
बाबा के आह्वान पर सभी यात्रियों और गांववासियों ने यमुना को बचाने का संकल्प लिया। बाबा ने कहा कि यात्रा में चलने के दौरान यात्रियों को कष्ट का अनुभव नहीं होता है क्योंकि वह भगवत नाम में व्यस्त रहता है।
बाबा ने बताया कि शेषशायी में भगवान कृष्ण लक्ष्मीनारायण और राधाजी लक्ष्मी बन गई थीं। क्षीर सागर से शेषजी प्रकट हुए और नारायण रूपी माधव शयन करने लगे। इसी के साथ नंदन वन और हताना के बारे में विस्तार से बताया।
यात्रा में आज
- आज बुधवार को यात्रा का पड़ाव कोसी में होगा। श्रद्धालु नगर में प्राचीन स्थलों के दर्शन करेंगे।