विरक्त संत रमेश बाबा के निर्देशन में रविवार को दहगांव पहुंची ब्रज चौरासी कोस यात्रा प्रत्येक पड़ाव को दैवी अनुभूति से सींच रही है। यात्रियों का कोकिलावन, बठैन सहित अनेक स्थानों पर जोरदार स्वागत किया गया। यात्रा पड़ाव पर पहुंचने पर पूरा गांव राधेमय हो गया। सोमवार को यात्रा चमेलीवन में पड़ाव करेगी।
ब्रजयात्रा कोकिलावन पड़ाव के बाद दहगांव पहुंची। रास्ते में राधे-कृष्ण, राधे-कृष्ण की धुनों पर सैकड़ों देशी-विदेशी यात्री नृत्य करते हुए सभी को मोह रहे थे। संत रमेश बाबा ने पड़ाव के दौरान कहा कि जर्जर सड़क के कारण अनेक यात्री चुटैल हो गए।
ऐसा भ्रष्टाचार कभी नहीं देखा। क्षेत्र की ज्यादातर सड़कें पूरी तरह से जीर्ण-शीर्ण हो चुकी हैं। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि ब्रज के प्रमुख तीर्थ स्थलों को आने वाले यात्री ऐसी सड़कों से गुजरेंगे।
प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि राधे-राधे के नाम भजने से सभी का कल्याण संभव है। शाम को पड़ाव पर बाबा ने कहा कि यह वह प्राचीन स्थान है जहां श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया था। ब्रजवासियों ने इस स्थान को उजड़ने से बचा लिया।
छोटी बालाओं की भक्ति ने भरा जोश
कोसीकलां। ब्रज चौरासी कोस यात्रा में मान मंदिर की बालाओं की भक्ति ने जमकर जोश भरा। बालाओं ने कहा कि बिना हरिनाम की शक्ति के संसार में कुछ भी संभव नही हैं। सभी कामों को करने के लिए भगवान के नाम का स्मरण करना जरूरी है। इसके लिए छोटी बालाओं ने कई उदाहरण भी दिए।
जिन्हें सुनकर पंडाल में मौजूद लोग दंग रह गए और तालियां बजाने को मजबूर हो गए। यात्रा में चल रही महिलाओं और युवतियों का भक्ति विभोर हो नृत्य को देख सभी मंत्र मुग्ध हो गए। उनका कहना था कि राधारानी सभी कामों को पूरा करेंगी।
रासौली पहुंच ब्रजयात्रियों ने किए रास मंडल के दर्शन
नंदगांव। मान मंदिर सेवा संस्थान की ओर से संचालित राधारानी ब्रजयात्रा अपने अगले पड़ाव रासौली पहुंची। इस दौरान बठैन के लोगों ने ब्रजयात्रा का स्वागत किया। सुबह ही ब्रजयात्रियों ने पांडव गंगा से रासवन की ओर कूच किया।
इस दौरान यात्रियों ने बड़ी बठैन, छोटी बठैन, चरन पहाड़ी आदि लीलास्थलों के दर्शन किए। सुबह 10 बजे यात्रा रासौली (रासवन) पहुंची। संध्या को नित्य प्रवचन के दौरान ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा ने लीलास्थलों के बारे में यात्रियों को जानकारी दी।