वृंदावन। वृंदावन के मध्य स्थित राजस्थानी स्थापत्य शैली के भव्य मंदिर में शुक्रवार को श्रीराधारमण महाराज का 484 वां प्राकट्योत्सव बड़े हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व प्रतिवर्ष बैशाख पूर्णिमा के दिन आयोजित किया जाता है और इसे भक्त बड़े श्रद्धा भाव से मनाते हैं।
पंचायत समिति श्री राधारमण जी महाराज के अनुसार, प्राकट्योत्सव के अवसर पर हजारों किलो दूध से महाभिषेक किया जाएगा। नगरभर में भजन-संकीर्तन, आरती और अन्य मंगलमय कार्यक्रम आयोजित होंगे। इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि लगभग 484 वर्ष पूर्व गोपाल भट्ट जी के प्रेम और भक्ति से भगवान श्रीराधारमणजी ने नेपाल की काली गंडकी नदी की शालिग्राम शिला से प्रकट होकर वृंदावन में अवतार लिया था। इस दिव्य अवतार का उद्देश्य भक्त प्रहलाद की भक्ति और धर्म की स्थापना करना था। प्राकट्योत्सव के दिन यमुना जल, इत्र, केसर, दूध, दही, शहद, पुष्प, वस्त्र, घी और अन्य दिव्य औषधियों से ठाकुर राधारमणदेव जू का महाभिषेक किया जाएगा।
इसके साथ भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन भी होगा। मंदिर में उत्सव को विशेष बनाने के लिए मंदिर के सेवायत आशीष किशोर गोस्वामी, पंकज गोस्वामी, पंकज कुमार गोस्वामी, शुभमकांत गोस्वामी, दिनेश कुमार गोस्वामी, गोपाल गोस्वामी, जयति कृष्ण गोस्वामी, प्रखर गोस्वामी, विशाल गोस्वामी, अनुभूति कृष्ण गोस्वामी, वरूण गोस्वामी, चन्द्रमणि गोस्वामी और राधाकान्त गोस्वामी जुटे हुए हैं। आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि श्रीराधारमण जी के विग्रह में गोविंददेव जी का मुख, गोपीनाथ जी का वक्षस्थल और मदनमोहन जी के चरणाविंद के दर्शन होते हैं। साथ ही प्रकट हुई अन्य 11 शालिग्राम शिलाओं की सेवा भी इसी प्रकार की जाएगी।