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छह और श्रद्धालु गोवर्धन और वृंदावन में कराए गए भर्ती

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मथुरा। भले ही यूपी प्रदूषण कंट्रूोल बोर्ड और एनजीटी ने राधाकुंड के पानी को आचमन लायक न माना हो लेकिन सोमवार की रात राधाकुंड में 60 से अधिक श्रद्धालुओं की हालत अन्नकूट का प्रसाद खाने से भी नहीं बिगड़ी थी। उन्हें तेज पेट दर्द के साथ उल्टी-दस्त दरअसल बासी खाने की वजह से हुए। घटना के 36 घंटे बाद डीएम के आदेश पर जांच के बाद एसडीएम गोवर्धन ने जो रिपोर्ट भेजी है उसमें श्रद्धालुओं की तबियत के बासी खाने के कारण ही बताया गया है।
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डीएम सर्वज्ञराम मिश्र ने बुधवार रात उप जिलाधिकारी की जांच आख्या का उल्लेख करते हुए बताया कि विगत एक सप्ताह में उल्टी एवं दस्त के कुल 15 मरीजों का उपचार किया गया। इसमें से 11 मरीजों का उपचार गिर्राज हॉस्पिटल राधाकुंड एवं 4 मरीजों का उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोवर्धन में किया गया।
30 अक्तूबर 2019 को उप जिलाधिकारी द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया गया। इसमें गिर्राज हॉस्पिटल में कोई मरीज भर्ती नहीं मिला। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोवर्धन में मात्र एक मरीज का उपचार होता हुआ पाया गया है। समस्त श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया है।
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इसके संदर्भ में अपर जिलाधिकारी प्रशासन सतीश कुमार त्रिपाठी ने बताया है कि राधाकुंड की सफाई के संबंध में संबंधित नगर पंचायत को निर्देशित कर दिया गया है। मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण को भी नगर पंचायत का कुंड की सफाई में तकनीकी सहयोग के निर्देशित किया गया है। राधाकुंड नगर पंचायत क्षेत्र में बिक्री किए जा रहे खाद्य पदार्थों की जांच के लिए अभिहित अधिकारी खाद्य सुरक्षा को निर्देशित किया गया है।
क्या था मामला
कार्तिक मास में करीब पिछले एक माह से नियम सेवा कर रहे पश्चिम बंगाल के 60 से अधिक श्रद्धालुओं की हालत मंगलवार की रात अचानक खराब हो हई। पेटदर्द के साथ उल्टी-दस्त की शिकायत पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया जहां बीस लोगों को वृंदावन भी भेजा गया। इतना सब होने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कोई सुध नहीं ली। राधाकुंड के जल से विषाक्तता की आशंका पर बुधवार देर शाम खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जांच के लिए राधाकुंड के पानी का सैंपल लिया। वहीं नायब तहसीलदार और अभिहित अधिकारी अस्पताल पहुंचे और मरीजों का हाल जाना था।
सुबह से ही शुरू कर दी थी जांच
एसडीएम राहुल यादव प्रात: 11 बजे ही राधाकुंड अन्य अधिकारियों के साथ पहुंच गए। यहां उन्होंने गिरिराज अस्पताल पहुंचकर डॉ भगवत गोस्वामी से मरीजों की जानकारी जुटाई और बीमारी के कारणों की पड़ताल की। निकटवर्ती मीरा मनोरंजन धर्मशाला पहुंचकर प्रबंधक सुब्रो मजूमदार से कार्तिक मास के श्रद्धालुओं के बारे में जानकारी भी जुटाई।
तदोपरांत राधाकुंड-श्याम कुंड पहुंचकर निरीक्षण किया। यहां खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने जल का नमूना लिया। टीम को खाद्य पदार्थों के नमूने के निर्देश भी दिए। इसकी जानकारी लगते ही आसपास के दुकानदार दुकानों को बंद कर भाग खड़े हुए। एसडीएम राहुल यादव ने बताया कि सभी मरीज खतरे से बाहर हैं। गिरिराज अस्पताल में पिछले पांच दिनों में डायरिया के प्रभावित 11 मरीजों का उपचार हुआ है।
छह और श्रद्धालु पड़े बीमार
वजह प्रदूषित अन्नकूट का प्रसाद हो या फिर राधाकुंड का पानी, बुधवार को भी छह श्रद्धालु पेटदर्द के साथ उल्टी-दस्त की शिकायत पर अस्पताल पहुंचे। पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के इन श्रद्धालुओं को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोवर्धन और वृंदावन के जिला संयुक्त अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय लोग भी श्रद्धालुओं केे बीमार होने से भयभीत हैं।
माना जा रहा है कि इनमें से अधिकांश लोग मांग कर भी खा लेते हैं। एक दिन पहले अन्नकूट का भी प्रसाद खाया। यही खानपान और प्रात:काल राधाकुंड में नियमित स्नान का दौर इनकी बीमारी का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
बुधवार को 65 वर्षीय सुंदा दास को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोवर्धन में तथा कोलकाता के कृष्ण नगर निवासी श्रद्धालु सुमित्रा मंडल (60), सुधीर पोद्दार (70), भानुदास (52), अधीर दास (60) व लकी विश्वास (50) को उल्टी दस्त की शिकायत पर जिला संयुक्त चिकित्सालय वृंदावन में भर्ती कराया है। डॉ. दिलीप कुमार का कहना है कि इसकी वजह प्रदूषित खाना व पानी हो सकता है। उसी कारण उल्टी दस्त श्रद्धालुओं को हो रहे हैं।
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