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मरे गोवंश को लेकर नगर पंचायत कार्यालय पहुंचीं जर्मन मूल की गो सेविका

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गोवर्धन/ राधाकुंड(मथुरा)। जर्मन मूल की गो सेविका पद्मश्री इरिना ब्रुनिंग फेड्रिक सुदेवी दासी ने मरे हुए गोवंश को लेकर बृहस्पतिवार को राधाकुंड नगर पंचायत कार्यालय में पहुंची। यहां गोवंश रखकर गोवंशों की समाधि के लिए भूमि न मिलने पर विरोध जताया। सुदेवी दासी ने कहा, ब्रजवासियों के गोवंश हैं, इन्हें विदेश से नहीं लाई। गोशाला में 2800 गोवंश की सेवा चल रही है। यहां प्रतिदिन बीमारी के चलते 15-20 गोवंश मर रहे हैं। इन्हें समाधि देने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। प्रशासन से भी सहयोग नहीं मिल रहा है।
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नगर पंचायत में सुनवाई न होने पर सुदेवी दासी गोवर्धन पहुंची। यहां पूरे मामले से एसडीएम सुरेश कुमार, सीओ राम मोहन शर्मा को अवगत कराया। एसडीएम सुरेश कुमार ने गो समाधि के लिए जमीन दिलाने के लिए राजस्त्व टीम को निर्देश दिए। सुदेवी ने बताया गो समाधि के लिए पाडल मार्ग पर एक बीघा जमीन प्रशासन ने दिलाई थी। मृत गोवंश की संख्या में इजाफा होने पर जमीन कम पड़ रही है। एसडीएम को अवगत कराया गया है। गोशाला में 2800 गोवंश की सेवा चल रही है। प्रतिदिन 30 गोवंश चोटिल व बीमारी से पीड़ित आती हैं। इसमें 15 से 20 प्रतिदिन मर जाते है। वहीं राधाकुंड के ईओ महेंद्र कुमार सिंह ने बताया सुदेवी दासी को मरे गोवंश के श्मशान स्थल के लिए भूमि पहले दे दी गई है। सुदेवी दासी भूमि पैमाइश के लिए एसडीएम के पास गई हैं।
दर्शन करर्ने आइं थीं, गोसेवा में जुट गईं
इरिना ब्रुनिंग फेड्रिक सुदेवी दासी 1978 में पहली बार ब्रज के भ्रमण पर आईं थीं। राधाकृष्ण की लीलाओं में वह ऐसी रम गईं कि ब्रज में रह कर गोवंश की सेवा करने लगीं। बीजा अड़चनों को दूर करने के लिए जर्मन जातीं थीं। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो बीजा अड़चनों पर विराम लग गया। 2019 में सुदेवी को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गो सेवा के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया। इसके बाद मथुरा जिला प्रशासन ने मुखराई में गोशाला के लिए 20 बीघा व गोवंश की समाधि के लिए तत्कालीन एसडीएम राहुल यादव ने 16 मार्च 2019 को राधाकुंड में एक बीघा जमीन पाडल मार्ग पर दी।
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गोशाला संचालक की कौन्हई में जमीन है। रास्ते पर कब्जा बताया गया है। रास्ते की पैमाइश करा कर कब्जा मुक्त कराने के निर्देश एसडीएम को दिए गए हैं।
- योगानंद पांडेय एडीएम वित्त/राजस्व
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