राजीव भवन में रखी बैटरी से चलने वाली ट्राई साइकिल और किताबें।
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मथुरा। जिले के विकास की योजनाएं जिस भवन में बनाई जाती हैं वो अपनी ही बदहाली पर आंसू बहा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन को ठेंगा दिखा रहे राजीव भवन के मुख्य द्वार से लेकर पूरे परिसर में कूड़े के ढेर आपको मिल जाएंगे। दीवारों पर न रंगाई न पुताई, गुटखे की पीकें चारों ओर मिल जाएंगी। पीने के लिए पानी और टायलेट तक नहीं है। दिव्यांगों के लाखों रुपये के उपकरण कबाड़ हो रहे हैं। इसी भवन में मुख्य विकास अधिकारी समेत एक दर्जन से ज्यादा जिला स्तरीय अधिकारी बैठते हैं, लेकिन ये बदहाली किसी को दिखाई नहीं देती।
राजीव भवन के मुख्य द्वार पर एक तख्ती लटकी है, जिस पर लिखा है चैनल गेट के सामने स्कूटर मोटरसाइकिल खड़ा करना सख्त मना है। रोजाना इसी चैनल गेट के सामने वाहन खड़े होते हैं। अंदर प्रवेश करते ही शीतल जल के लिए एकमात्र आरओ वाटर एटीएम प्लांट लगा है, जो काफी समय से खराब है। जहां आरओ प्लांट लगा है वो स्थान अब पीकदान बना है।
राजीव भवन के अंदर ही कर्मचारी अपनी बाइकें खड़ी करते हैं। निचली मंजिल पर ही एकमात्र टायलेट है, जो गंदगी से अटा है। वहां खड़ा होना भी कोई पसंद नहीं करेगा। दीवारें तो पीक से रंगी हैं ही कमरों के गेट पर भी लोग पीक मारते हैं।
कबाड़घर में तब्दील हुआ सभागार
राजीव भवन में बना सभागार कबाड़घर में तब्दील हो चुका है। इस सभागार का लोकार्पण सितंबर 2000 में ग्राम्य विकास मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने किया था। उन दिनों आईएएस अमृत अभिजात मुख्य विकास अधिकारी थे। सभागार के अंदर दिव्यांगों के उपकरण कबाड़ हो रहे हैं। उपकरणों और कुर्सियों पर जमी कबूतरों की बीत देखकर लगता है कि लंबे समय से इस सभागार की सफाई नहीं हुई है। ग्राम्य पंचायत दिग्दर्शिका के सैकड़ों बंडल खुले में और बोरों में भरे पड़े हैं, जिन पर कबूतरों की बीट जमी है।
बयान
राजीव भवन में सफाई कार्य, पेयजल और टायलेट की व्यवस्था शीघ्र कराई जाएगी। दिव्यांगों के उपकरणों को दुरुस्त कराया जाएगा। सभागार को भी व्यवस्थित किया जाएगा। इस कार्य के लिए जिला विकास अधिकारी को नामित किया गया है।
- रामनेवास गुप्ता, मुख्य विकास अधिकारी