भगवान की हर लीला सार्थक और दर्शन का संदेश देने वाली है। अगर प्रभु की कृपा हो जाए तो अज्ञानी भी प्रभु की लीलाओं के गूढ़ रहस्य को जान जाता है। ये विचार श्रीप्रियाकान्त जू दिव्य दर्शन महोत्सव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने व्यक्त किए।
कथा का श्रवण कराते हुए उन्होंने कहा कि गोपियों के संग कृष्ण के रास को आधुनिकतावादी दूसरे अर्थों में देखते हैं जबकि हकीकत यह है कि कृष्णगोपियों के महारास में कामदेव का भी मर्दन हुआ। अर्थात महारास में काम का नाश हुआ। गोपियों के अगाध प्रेम का कोई पार नहीं है।
निस्वार्थ प्रेम के आगे भगवान को भी नतमस्तक होना पड़ता है। उन्होंने कंसवध लीला भी सुनाई। इस अवसर पर श्रीरामजन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपालदास महाराज ने व्यास पूजन किया।
इस अवसर पर प्रभा पाण्डेय, मुकेश कुमार, सीमा, शिवकुमार, गजानन कानड़े, रंजना गुप्ता आदि उपस्थित रहे ।