मथुरा। अब डिग्री कॉलेज के प्राचार्य, प्रोफेसर व कर्मचारियों को भी अपनी चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा देना होगा। इसके बाद ही उनके विभागीय कार्य संपन्न हो सकेंगे। इस संबंध में क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश सिंह ने पत्र जारी कर किसी भी स्थिति में 31 जनवरी तक विवरण देने के निर्देश दिए हैं।
शासन द्वारा पिछले साल दो दिसंबर को पत्र जारी कर चल-अचल संपत्तियों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर देने के आदेश किए थे। उच्च शिक्षाधिकारी ने इस संबंध में सभी प्राचार्यों को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं। सभी प्राचार्यों ने भी अपने-अपने महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर, प्रोफेसर व कर्मचारियों को इस बाबत निर्देश दिए हैं। साथ ही निर्देशित किया गया है कि यदि कार्मिकों द्वारा समय पर अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण पोर्टल पर प्रस्तुत नहीं किया गया तो उनके पदोन्नति प्रकरणों पर भी विचार-विमर्श नहीं किया जाएगा।
आदेश में यह भी कहा गया है कि इस मामले में शिथिलता न बरती जाए। लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों व कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासन एवं अपील नियमावली के तहत कार्रवाई की जाएगी।
फिर भी समय देने से कतराते हैं शिक्षक...
राजकीय व एडेड महाविद्यालयों में शिक्षकों का न्यूनतम वेतन एक लाख और अधिकतम करीब 3.50 लाख है। इसके अलावा उन्हें मूल्यांकन, प्रयोगात्मक परीक्षा में ड्यूटी, निरीक्षण करने का अतिरिक्त पारिश्रमिक मिलता है। इसके बाद भी शिक्षक महाविद्यालय में समय देने से कतराते हैं।