वृंदावन। ठाकुर श्रीराधा-दामोदर मंदिर के सेवायत दामोदर चंद्र गोस्वामी की यूनाइटेड किंगडम (यूके) की यात्रा ने एक बार फिर विश्व में इस्कॉन के श्रील एसी भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद की गौरवशाली विरासत को चर्चा में ला दिया है। जिस मंदिर से प्रभुपादजी ने अपने वैश्विक आध्यात्मिक मिशन की शुरुआत की थी, उसी परंपरा को आज मंदिर के सेवायत विदेशों में आगे बढ़ा रहे हैं।
मंदिर के बड़े गोसाईं आचार्य कनिका प्रसाद गोस्वामी महाराज ने बताया कि श्रील प्रभुपाद ने श्रीराधा-दामोदर मंदिर में लंबे समय तक निवास किया। यहीं उन्होंने गहन साधना, अध्ययन और श्रीमद्भागवत के अंग्रेजी अनुवाद सहित सनातन धर्म के वैश्विक प्रचार-प्रसार की नींव रखी। उन्होंने पश्चिमी देशों, विशेषकर यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका सहित विश्वभर में सनातन संस्कृति और श्रीकृष्ण भक्ति का व्यापक प्रचार किया।
गोस्वामी ने बताया कि प्रभुपाद द्वारा स्थापित आध्यात्मिक चेतना आज भी विश्व के अनेक देशों में लाखों लोगों को भारतीय संस्कृति और वैष्णव परंपरा से जोड़ रही है। यूके में बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रीकृष्ण भक्ति और सनातन संस्कृति से जुड़े हुए हैं, जो प्रभुपाद के अथक प्रयासों का परिणाम है।
आचार्य कनिका प्रसाद ने बताया कि मंदिर के सेवायत दामोदर चंद्र गोस्वामी 11 दिवसीय यूके प्रवास पर हैं। उन्होंने लंदन के मनोर स्थित भक्ति वेदांत मनोर कृष्ण हवेली सहित इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के विभिन्न शहरों में धार्मिक सभाओं को संबोधित किया। इस दौरान वृंदावन धाम, राधा दामोदर मंदिर और सनातन संस्कृति की महिमा का प्रचार किया। इस दौरान प्रवासी भारतीयों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। आचार्य ने कहा कि प्रभुपादजी के बाद राधा दामोदर मंदिर के इतिहास में यह पहली बार है जब मंदिर के वर्तमान सेवायत यूके की धरती पर जाकर ठाकुरजी की महिमा का प्रचार कर रहे हैं।
प्रमुख आचार्यों से शिष्टाचार भेंट
प्रचार यात्रा के दौरान दामोदर चंद्र गोस्वामी ने यूके में सक्रिय विभिन्न वैष्णव संस्थाओं के प्रमुखों से मुलाकात की। उन्होंने गौड़ीय मिशन के त्रिदंडी स्वामी याचक महाराज से शिष्टाचार भेंट की। वहीं स्कॉटलैंड में उनकी मुलाकात वहां के प्रमुख संत प्राण प्रभुपाद और गौड़ीय मठ के अध्यक्ष वैष्णव दास से हुई। इन मुलाकातों के दौरान सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार पर गहन चर्चा की गई।