नोटबंदी के बाद अब किसानों पर मंदी की मार पड़ी है। कोल्ड स्टोर में रखा आलू इतना सस्ता हो गया कि उसे बेचकर इतनी रकम भी नहीं मिल पाएगी जो स्टोर का किराया निकल सके। लिहाजा सैकड़ों किसान आलू लेने ही नहीं पहुंच रहे हैं। कोल्ड स्टोर वालों ने भी आलू को निकालकर बाहर फेंक दिया है।
मथुरा जिले में में 18000 हेक्टेयर में करीब डेढ़ लाख किसान आलू की खेती करते हैं। फरवरी में किसानों ने आलू की खोदाई की उस समय इसका रेट मात्र 800 रुपये कुंतल था। इस कारण अच्छे रेट की आस में किसानों ने इसे मार्च तक कोल्ड स्टोर में रखवा दिया। स्थिति यह हो गई कि जिले के सभी 42 कोल्डस्टोर फुल हो गए।
अब आलू का रेट 250 रुपये कुंतल तक पहुंच गया है। ऐसे में किसान कोल्ड स्टोर का किराया भी नहीं निकाल पा रहे हैं। कोल्ड स्टोर वाले 120 से 140 रुपये प्रति बोरा का किराया लेते हैं। यानी एक बोरे में 50 किलो आलू होता है। मौजूदा भाव के हिसाब से आलू का एक बोरा हो गया 150 रुपये का। कुछ बचत न होने के कारण किसान कोल्डस्टोर से आलू निकालने के लिए पहुंच ही नहीं रहे हैं। जबकि कोल्डस्टोर वाले नोटिस पर नोटिस जारी कर रहे हैं।
अब कोल्डस्टोर वालों ने आलू को स्टोर से बाहर निकालकर फेंक दिया है। किसी कोल्डस्टोर में आलू के 12000 बोरे रखे हैं तो कहीं 10000। नगला तेजा के किसान पूरन सिंह, कारव के मोहन सिंह, सिहोरा के लाल सिंह ने बताया कि आलू की जितनी बेकदरी इस बार हो रही है कभी नहीं हुई। यदि कोल्डस्टोर से आलू निकाल कर लाएंगे तो घर से पैसा देना पड़ रहा है।
गायों को खिला रहे आलू
आलू की इतनी बेकदरी हो रही है कि कोई पूछ ही नहीं रहा है। छोटे साइज के आलू किर्री और गुल्ला को कोई व्यापारी लेने को तैयार नहीं हैं, लिहाजा जिले की गऊशालाओं को भेजा जा रहा है। कोल्ड स्टोर वालों ने बताया कि उस आलू को ब्रज की गऊशालाओं में गायों के खाने के लिए भेजा जा रहा है।