मथुरा। रोडवेज में टिकट घोटाला करने वाले चालक-परिचालक को बचाने के लिए राजनीतिक दखल दी जा रही है। एक मंत्री के भतीजे परिवहन निगम के अधिकारियों को फोन करके मामले को दबाने की सिफारिश कर रहे हैं। खास बात यह है कि टिकटों की अनियमितता के इस गंभीर मामले को साधारण या लापरवाही में तब्दील किए जाने की साजिश रची जा रही है। मगर ये मामला विभाग में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
मामला 10 नवंबर का है। रात करीब 9 बजे मथुरा-गोवर्धन रोड पर चेकिंग कर रहे सचल दल के अधिकारी आलोक शर्मा और धर्मवीर सोलंकी ने रोडवेज की बस संख्या 3970 को रोकना चाहा, लेकिन चालक ने तेजी से बस दौड़ा दी। सचल दल बस के पीछे लग गया। चालक ने सवारियां उतारने के लिए जैसे ही बस रोकी, तभी सचल दल ने बस को पकड़ लिया। परिचालिका से ईटीएम (इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन) मांगी तो उसने नहीं दी। इसके बाद सचल दल ने बस में सवार यात्रियों के बयान लिए थे, जिसमें 8 यात्री बिना टिकट मिले। जानकारी करने पर उन्होंने बयान दिया कि पैसे तो ले लिए हैं, लेकिन परिचालिका ने टिकट नहीं दी।
मंत्री के गांव की है परिचालिका
आरोप लग रहे हैं कि एक मंत्री के भतीजे ने फोन कर परिवहन निगम के अधिकारियों पर दबाव बनाया है। ताकि चालक–परिचालक के खिलाफ कार्रवाई को कमजोर किया जा सके। सचल दल की दर्ज रिपोर्ट में मामले को डब्ल्यूटीओ (विदाउट टिकट ऑफेंस) की श्रेणी में रखा गया था। जो चालक, परिचालक पर सीधा और कड़ा दंड निश्चित करता है, लेकिन कथित दबाव के चलते इस मामले को नॉन स्टॉप केस में बदलने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि आरोपियों को आसानी से क्लीन चिट मिल सके। बताया जा रहा है कि परिचालिका मंत्री के गांव की ही है। इस वजह से मंत्री के भतीजे ने अधिकारियों पर दबाव बनाया है। हालांकि मामला अभी जांच की आड़ में दबा है, लेकिन विभाग में चर्चाएं गरम हैं।
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इस मामले में जांच आगरा फोर्ट की एआरएम कर रही हैं। अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट मथुरा के एआरएम को दे दी जाएगी।
बीपी अग्रवाल, आरएम