फोटो 15 जेपी मलिक फोटोग्राफर मलिक स्टूडियो वाले
- फोटो : MATHURA
मथुरा। हर एक बेहतरीन विहंगम तस्वीर के पीछे एक कहानी होती है, किसी फोटोग्राफर का नजरिया भी होता है। सन 1896 में जोसेफ नीसफर नीप्स द्वारा किए गए फोटोग्राफी कैमरा के आविष्कार से लेकर अब तक यूं तो फोटोग्राफी की कई विधाएं विकसित हुई हैं और आज मोबाइल फोन के साथ जुड़कर कैमरा लगभग हर हाथ में पहुंच गया है। फोटोग्राफी में समय के साथ कई परिवर्तन होते गए।
कच्ची सड़क निवासी फोटोग्राफर विजय कुमार अग्रवाल ने कहते हैं कि फोटोग्राफी में समय के साथ परिवर्तन होते गए। रोलीफ्लेक्स आदि कैमरे एक रोल में केवल 12 चित्र लेते हैं, बाद में 35 एमएम कैमरे अपनी जगह बनाने लगे। इनमे टेली एंगल, वाइड लाइन लेंस का प्रयोग होने लगा, फ्लैश भी तकनीकी सुधार के अधिक प्रभावशाली और छोटी हो गई। इससे फोटोग्राफर को कार्य करने में आसानी हो गई। उन्हें स्कूल के समय से फोटोग्राफी का शौक रहा, जो 1970 में व्यवसाय बन गया। ये दौर ब्लैक एंड वाइट फोटोग्राफी का था, तकनीकी की उस समय अपनी सीमाएं थी, उस समय अनुभव ही इस विधा का आधार था। पहले रात में फोटो लेने के एक बल्ब खर्च हो जाता था। हमारे समय में कंधे पर बैटरी बैग लटकाकर फ्लैश गन आ चुकी थी। उस समय बड़े बड़े स्कूलों के बड़े ग्रुप फ़ोटो हमारे सीनियर रासबिहारी, चिरंजिलाल, मालिक साहब, गोपाल वर्मा, राजनारायण द्वारा लिए जाते थे।
शहर के जाने माने फोटोग्राफर जेपी मलिक का पूरा जीवन ही फोटोग्राफी में ही गुजर गया। 81 वर्ष के जेपी मलिक ने फोटोग्राफी की शुरुआत पिता बीआर मलिक के साथ की। ब्लैक एंड व्हाइट कैमरे से स्कूल से लेकर बड़े आयोजन तक कवर किए। उन्होंने अपने जीवन में फोटोग्राफी को बदलते देखा है। 65 वर्ष अपना जीवन फोटोग्राफी में देने के बाद अब उनके पुत्र भी फोटोग्राफर हैं। जेपी मलिक अपने बेटे को फोटोग्राफी की नई दिशा दिखाते हैं।