कार्तिक शुक्ल एकादशी (देव उठान एकादशी) पर तीनों वन (मथुरा, वृंदावन और गरुण गोविंद) की परिक्रमा के लिए शद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मथुरा की पंचकोसीय परिक्रमा लगाकर भी श्रद्धालुओं ने पुण्य अर्जित किया।
मान्यता है कि चतुर्वेदी समाज कंस वध के पश्चात हत्या के पाप से मुक्ति के लिए तीनों वन की परिक्रमा करता है। इसी परंपरा के निर्वहन के लिए शनिवार मध्य रात्रि से ही बड़ी संख्या में चतुर्वेदी समाज के लोगों ने जयकारों के साथ तीनों वन की परिक्रमा शुरू कर दी।
भोर होते-होते श्रद्धालुओं की मानव शृंखला बन गई। परिक्रमार्थियों के स्वागत के लिए ब्रजवासियों ने जगह-जगह फलाहार, चाय-नाश्ते, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था कर रखी थी।
गन्ना-सिंघाडे़ की खरीददारी की होड़
देवोत्थान एकादशी को रात्रि में देव उठान की पूजा में गन्ना और सिंघाड़ों का प्रयोग किया जाता है। इसी के चलते परिक्रमा मार्ग में गन्ना और सिंघाड़ों की खूब बिक्री हुई।
द्वारिकाधीश में बदला दर्शन का समय
मथुरा। कार्तिक स्नान करने वाली महिलाओं ने देवोत्थान एकादशी पर तुलसी और सालिग्राम भगवान का विवाह उत्सव मनाया। श्रीद्वारिकाधीश मंदिर में तुलसी-सालिग्राम के विवाह के साथ ही मंदिर दर्शनों के समय में परिवर्तन हो गया।
सोमवार से उत्थापन के दर्शन 3:30 बजे से 3:50 बजे तक, भोग के दर्शन 4:20 बजे से 4:40 बजे तक, संध्या आरती 4:55 बजे से 5:10 बजे तक और शयन के दर्शन 6-7 बजे तक होंगे। सुबह की झांकी पूर्व की तरह ही होंगी।