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Mathura News: पापा... मैं मार्शल आर्ट जानती हूं, खतरा आया तो मुंहतोड़ जवाब दूंगी

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मथुरा। कभी अबला कही जाने वाली नारियों ने अब आत्मरक्षा के गुर सीखकर सबला बनकर रहने की ठान ली है। बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने के लिए अविभावक स्वयं आगे आए हैं। मार्शल आर्ट सीख चुकीं बेटियां अब खतरे को पास भी नहीं भटकने देंगी।
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समाज में हुईं विभिन्न घटनाओं को समझते हुए अविभावक अब अपनी बेटियों को मार्शल आर्ट और ताइक्वांडो की प्रशिक्षण दिला रहे हैं। शहर की लगभग 20 से अधिक बच्चियों को मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दे रहे गोविंद अग्रवाल बताते हैं कि बेटियों को आत्मरक्षा के प्रति हमेशा जागरूक होना चाहिए। आज के समय में आत्मरक्षा की बहुत अधिक आवश्यकता है। बच्चियों में भी मार्शल आर्ट के प्रति काफी रुझान बढ़ा है। आत्म रक्षा का प्रशिक्षण पा चुकी बच्चियां अविभावकों के सामने पूरे स्वाभिमान के साथ बात करतीं है। इसी कारण अविभावक भी अब निश्चिंत हैं।
वर्जन

छह महीने से मार्शल आर्ट सीख रही हूं, यह बात काॅलेज में काफी लोगों को पता है। साथी सहपाठी बातचीत में नियमित शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ तो पास भी नहीं आते हैं।
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आयुषी-

आत्मरक्षा के गुर सीखकर ही हम आत्म बल के सहारे खुद को बचा सकते हैं। किसी भी स्थिति में सामना करने के तैयार रहते हैं। कभी भी हमला सामने वाले की कमजोरी या मजबूती को देखकर नहीं किया जाता।
विशाखा दीक्षित-

खतरा हमेशा बाहरी होता है, लेकिन ये आत्म रक्षा के गुर हमें भीतर से मजबूत बनाते हैं। इससे हमें इस बात का बोध होता है कि हम सामने वाले को कैसे गिरा सकते हैं। यह ज्ञान उसके पास नहीं होता है।
अजंलि-

आत्म रक्षा के प्रशिक्षण से सीखे गुर से ही बहुत कुछ किया जा सकता है। तानी हुई बंदूक के रुख को मोड़ा जा सकता है। इसके बल पर हम अपने जीवन और अस्तित्व दोनों को बचा सकते हैं।
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राधिका दीक्षित-
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