मुठभेड़ में अपराधी के मारे जाने के बाद मौके पर जांच करती पुलिस
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उत्तर प्रदेश के मथुरा में पंकज यादव चोरी के मुकदमे में 2007 में गाजीपुर जेल गया था। वहां उस वक्त माफिया रहा मुख्तार अंसारी मऊ दंगे के आरोप में बंद था। पुलिस महकमे के लोग बताते हैं कि पंकज की जेल में मुख्तार से मुलाकात हुई। नौजवान और पैसों के लालची पंकज को मुख्तार ने अपने झांसे में ले लिया। पंकज जेल में मुख्तार की सेवा करने लगा था। मुख्तार से उसने अपराध की पाठशाला ली थी।
पंकज यादव शॉर्प शूटर ही नहीं, बल्कि शातिर दिमाग भी था। एसटीएफ आगरा के इंस्पेक्टर यशपाल शर्मा बताते हैं कि पंकज अपने पास मोबाइल तो रखता था। मगर, सिम नहीं लगाता था। उसने एक व्हाट्सएप अकाउंट बना रखा था। उसी पर चैटिंग व कॉलिंग करता था। इसके लिए वह एक इंटरनेट डोंगल रखा था।