राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना में वाहनों के बड़े घोटाले के खुलासे के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मिशन निदेशक की जांच और आदेश को ही नकार रहे हैं। उनका कहना है कि गड़बड़झाला अन्य जिलों में हुआ है, मथुरा में नहीं।
स्वास्थ्य विभाग की बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना में वाहनाें के प्रयोग में फर्जीवाड़ा हुआ है। चार पहिया वाहनों के प्रयोग के बिल लगाए गए लेकिन जांच में दिए गए नंबर दोपहिया वाहनों के निकले। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक आलोक कुमार ने जांच में इस बात का खुलासा किया कि मथुरा में फरह और छाता विकास खंड में भी गोलमाल हुआ है।
यहां जिस गाड़ी के संचालन की बात कही जा रही थी उसका दिया गया नंबर मोटर साइकिल का निकला। वहीं दूसरे वाहन का नंबर ही गलत पाया गया। जांच के बाद मिशन निदेशक ने जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष और जिलाधिकारी निखिल चंद्र शुक्ला को एफआईआर के आदेश दिए।
इतने गंभीर मामले में मिशन के निदेशक के आदेश को ही अफसर नकार रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विवेक मिश्रा ने कहा कि ये गोलमाल प्रदेश के अन्य जिलों से संबंधित है। मथुरा से इसका कोई लेना देना ही नहीं है।