देश की आन बान और शान की खातिर प्राण न्यौछावर करने वालों को सेना सिर आंखों बिठाती है। स्ट्राइक वन कोर के स्वर्ण जयंती अवसर पर बुधवार को इस आभास सेना के अधिकारियों ने कराया। पारंपरिक बिगुल की धुन ‘दि लास्ट पोस्ट’ जब अधिकारी शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित करने बढ़े, तो माहौल शौर्यमय हो गया। इस दौरान 1965, 1971 और अन्य आपरेशन में शहीद हुए सैनिकों को भी याद किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में स्ट्राइक वन कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल एबी शिवाने कोर के सभी अधिकारियों और सैनिकों का प्रतिनिधित्व करते हुए शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित किया। इस अवसर पर पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल और वर्तमान में अंडमान निकोबार के उपराज्यपाल एके सिंह, आर्मी कमांडर दक्षिण-पश्चिमी कमांड लेफ्टिनेंट जनरल एके साहनी, पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल जेजे सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह, आर्मी कमांडर पश्चिमी कमांड, लेफ्टिनेेंट जनरल रवि थोड़गे मास्टर जनरल आर्डिनेंस, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल आनंद स्वरूप, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एसआर घोष और पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल सीएसके साबु सहित दर्जनों सेनाधिकारी उपस्थित थे।
सभी ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया। सेना के बिगुल की धुन पर सैनिकाें ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। दो मिनट का मौन भी रखा गया। शहीदों को श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध की याद में बनाए गए संग्रहालय ‘दि हेरिटेज’ का उद्घाटन हुआ। इस संग्रहालय में स्ट्राइक वन कोर की शौर्य गाथा का विस्तृत वर्णन है। यहां कोर के तीन परमवीर चक्र, 16 महावीर चक्र और 71 वीर चक्र विजेताओं के नाम और सचित्र विवरण उपलब्ध है। इस दौरान 1965 और 1971 युद्ध की चित्र संग्रह पुस्तक का विमोचन भी हुआ।
शाम को छावनी स्थित तारोपोर हाल में इस स्वर्ण जयंती कार्यक्रम के प्रथम दिवस आवरण का विमोचन लेफ्टिनेंट जनरल एके साहनी, आर्मी कमांडर दक्षिण-पश्चिमी कमांड ने किया गया। इस अवसर पर 1965 और 1971 भारत-पाक युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों का सम्मान भी किया गया।