फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mathura News: राया अग्निकांड में एक किशोर की मौत, 5 पहुंची मृतकों की संख्या

विज्ञापन
विज्ञापन
मथुरा। राया के पटाखा बाजार में दिवाली के दिन भीषण अग्निकांड में झुलसे लोगों की मौत का सिलसिला रुक नहीं रहा है। बृहस्पतिवार को नौहझील निवासी राजेश (17) ने दिल्ली एम्स में दम तोड़ दिया। उसके पिता और दो भाई जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। इस हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से दो हाथरस के हैं। वे राजेश के मामा थे। फिलहाल 7 लोग गंभीर हालत में उपचाराधीन हैं। इधर, जिला प्रशासन ने मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है।
विज्ञापन


नौहझील के आजाद नगर निवासी मोहन सिंह ने राया के गोपाल बाग में पटाखों की दुकान लगाई थी। पिता की मदद के लिए बड़ा बेटा रिंकू (26), राजेश और जतिन (15) भी दुकान पर मौजूद थे। आग से चारों लोग झुलस गए थे। मोहन सिंह की पत्नी के भाई सुशील व ठाकुरदास निवासी बमनई, हाथरस ने भी पटाखों की दुकान लगाई थी। इनकी मंगलवार को मौत हो गई। बृहस्पतिवार को एम्स में उपचार के दौरान राजेश ने भी दम तोड़ दिया। शाम को दिल्ली से शव गांव पहुंचा तो परिजन बिलख उठे। परिवार की पीड़ा देख हर किसी की आंखें नम हो गईं। देर शाम गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया।

दैवीय आपदा कोष दी जाएगी सहायता राशि

मृतकों के आश्रितों को प्रशासन चार-चार लाख रुपये मुआवजा देगा। दैवीय आपदा कोष से इस सहायता राशि को दिया जाएगा। डीएम शैलेद्र कुमार सिंह ने बताया कि हादसा बेहद दुखद है। शासन को इस घटना की गंभीरता से अवगत कराते हुए मृतकों के परिजनों की आर्थिक स्थिति भी बताई गई है, जिसके बाद शासन ने मृतक आश्रितों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने की मंजूरी दे दी है।
विज्ञापन



बहन की डोली से पहले उठी भाई की अर्थी
मथुरा। राया अग्निकांड में झुलसे परिवारों की खुशियों को धीरे-धीरे ग्रहण लगता जा रहा है। हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है। नौहझील का राजेश बहन रेखा की डोली उठाने की तैयारी कर रहा था पर नियति ने ऐसा खेल खेला कि बहन की डोली उठाने का अरमान संजोने वाले राजेश की अर्थी उठ गई। रेखा के मामा ठाकुरदास और सुशील भी भांजी की शादी को लेकर उत्साहित थे। उन्होंने बहनोई मोहन से वादा किया था कि नरसी सा भात भरेंगे, लेकिन काल ने उनके नसीब में कफन लिख दिया।

मोहन सिंह के परिवार में बेटा रिंकू, राजेश, जतिन और बेटी रेखा के अलावा पत्नी फूलवती है। पटाखों के कामकाज से ही उनका परिवार चल रहा था। बेटी रेखा की शादी कुछ समय पहले ही तय की थी। देवोत्थान के बाद 26 नवंबर को सगाई और 28 को शादी का मुहूर्त निकला था। धूमधाम से शादी कर सके, इसके लिए मोहन सिंह ने इस दिवाली अच्छी तादाद में माल भरकर दुकान सजाई थी। इधर, मोहन सिंह और उनकी पत्नी फूलवती से ठाकुरदास और सुशील ने वादा किया था कि वह रेखा की शादी में ऐसा भात भरेंगे कि गांव-रिश्तेदारी में हर कोई देखता रह जाएगा। राजेश बहन की शादी की तैयारी में जुटा था। कपड़े, गहने, सामान सभी वह अपनी पसंद का देना चाहता था।


फूलवती की पथरा गईं आंखें
फूलवती के अपने घर और ससुराल में मौत हो चुकी है। रोते-रोते उसकी आंखें पथरा गईं हैं। दो दिन पहले भाइयों की मौत के गम से पूरी तरह टूट चुकी थी। भगवान से आस कर रही थी कि उसके बेटे और पति ठीक हो जाएं, लेकिन बृहस्पतिवार को जब बेटे राजेश का शव घर आया तो वह बेसुध हो चुकी थी। बड़ी संख्या में लोग सांत्वना देने घर पहुंचे। परिजनों का विलाप देखकर वे खुद के आंसू भी नहीं रोक सके।






किसकी वजह से मौत ने मचाया तांडव
मथुरा। राया अग्निकांड पांच मौतों के बाद बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर वो कौन था, क्या कारण थे, किसकी लापरवाही थी, किसने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, जिसकी वजह से मौत का तांडव देखने को मिल रहा है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने इस मामले में सीओ महावन और एसडीएम मांट को जांच सौंपी है। प्रथम दृष्टया जांच के बाद सीएफओ नरेंद्र कुमार सिंह अपनी रिपोर्ट सौंप चुके हैं। उनका कहना है कि पटाखा बाजार में देशी आतिशबाजी थी।

बाजार के पास ही किसी ने आतिशबाजी दागी, जिसका सुलगता हुआ कुछ हिस्सा अन्य आतिशबाजियों पर गिरा और आग भड़क गई। हालांकि अभी इस मामले में कोई ठोस जांच रिपोर्ट नहीं आई है। न ही किसी पर मुकदमा दर्ज किया गया है। सवाल यह भी खड़े हो गए हैं कि आखिर किसकी निगरानी में चूक हुई, जो बाजार में देशी बारूद आ गया। क्यों जिम्मेदारों ने लापरवाही बरती और नाबालिगों को भी बिक्री करने से नहीं रोका। क्यों दुकानों को सजाने के लिए पर्दे का इस्तेमाल करने दिया गया।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें