एक्सप्रेसवे पर गति सीमा के मानकों को रोजाना वाहनों के पहिये तले रौंदा जा रहा है। छोटे वाहनों की 100 किलोमीटर प्रति घंट और बड़े वाहनों की 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार की अनदेखी कर सैकड़ों वाहन दोगुनी गति का फर्राटा और लोड लेकर गुजर रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर पुलिस भी कभी-कभी नजर आती है। आंकड़ों में रोजाना ओवरस्पीडिंग करने वाले वाहनों की संख्या हजारों में है लेकिन चालान के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
गौरतलब है कि नोएडा से आगरा तक 165 किमी लंबे सफर को आरामदेह बनाने वाला यमुना एक्सप्रेसवे खूनी एक्सप्रेसवे के रूप में पहचाना जाने लगा है। बीते साढ़े चार साल में सैकड़ों लोग यहां हुए हादसों में जान गवां चुके हैं। इसके बाद भी ओवर स्पीडिंग पर लगाम की कोशिश नहीं की जा रही है। बताया गया है कि 15 दिसंबर को यमुना एक्सप्रेसवे के जेबर टोल प्लाजा से 5841, आगरा से 1504, मथुरा टोल से 990 गाड़ियां ओवर स्पीड में निकलीं लेकिन चालान किसी का भी नहीं हुआ।
16 दिसंबर को जेबर टोल प्लाजा से 5275, आगरा टोल प्लाजा से 2026 और मथुरा टोल प्लाजा से 507 वाहन ओवर स्पीड गुजरे। जेबर में 28, आगरा में 0 और मथुरा में आठ वाहनों के चालान हुए। 17 दिसंबर को जेबर टोल प्लाजा से 5512, मथुरा से 410 और आगरा टोल से 2488 वाहन निकले। चालान जेबर में 28, मथुरा में सात और आगरा में शून्य रहे। 18 दिसंबर को जेबर टोल से 7062, मथुरा टोल से 634 और आगरा टोल से 3285 वाहन निकले। चालान जेबर में 24, मथुरा में 13 और आगरा में शून्य हुए। 19 दिसंबर को जेबर टोल पर 8133, मथुरा टोल पर 895 और आगरा टोल से 3134 वाहन निकले। चालान जेबर में 34, मथुरा में 22 और आगरा 17 वाहनों के हुए।
मामले में एक्सप्रेसवे पर कॉरिडोर प्रभारी मेजर मनीष सिंह का कहना है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर ओवरस्पीड और ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी आरटीओ व ट्रैफिक पुलिस की है। हम लोग रोजाना पुलिस को डाटा उपलब्ध कराते हैं लेकिन पुलिस कार्रवाई नहीं करती है।