मथुरा। सोमवती अमावस्या का पर्व मथुरा नगरी में श्रद्धा के साथ मनाया गया। मंदिरों में दीपदान से लेकर धार्मिक आयोजन हुए। यमुना की महाआरती का आयोजन किया गया। यहां भक्तों की भीड़ रही।
सोमवती अमावस्या पर सोमवार की सुबह यमुना के पुण्य तीर्थ विश्राम घाट, राजा घाट, बंगाली घाट पर भक्तों ने यमुना में स्नान किया। इसके बाद यमुना में दुग्धाभिषेक कर आरती की गई। इस मौके पर भक्तों ने मथुरा की पंसकोसीय परिक्रमा भी दी। अधिक ठंड होने के बाद भी भक्तों की आस्था नहीं डिगी। बुजुर्गों ने भी यमुना स्नान किया। इसके बाद द्वारिकाधीश मंदिर, प्राचीन केशवदेव, रंगेश्वर मंदिर, बिरला मंदिर, मां चामुंडा आदि मंदिरों के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। सोमवती अमावस्या पर पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के द्वारिकाधीश महाराज ने भक्तों को विशेष शृंगार में दर्शन दिए। भक्तों ने भी अपने आराध्य की आठों झांकियों के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। मंदिर प्रांगण राजाधिकराज के जयकारों से गुंजायमान हुआ। इधर शाम सात बजे पुण्य तीर्थ विश्राम घाट पर मां यमुना की विशेष आरती का आयोजन किया गया। यहां मां यमुना की आरती में शामिल हुए भक्तों ने मां का गुणगान किया।
दीर्घ विष्णु मंदिर में हुुआ विष्णु सहस्रनाम का पाठ व हवन
सोमवती अमावस्या पर घीया मंडी स्थित प्राचीन श्री दीर्घविष्णु मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान हुए। शाम को दीपदान हुआ। प्रात: मंगला आरती के पश्चात मंदिर के सेवायत बाल कृष्ण चतुर्वेदी व लाल कृष्ण चतुर्वेदी द्वारा वैदिक विधि विधान से भगवान श्री दीर्घ विष्णु एवं महालक्ष्मी जी का केसर चंदन युक्त सुगंधित जल से पुरुष सूक्त व श्री सूक्त से अभिषेक कराया गया। तत्पश्चात मनोहारी शृंगार धारण कराया और भगवान को माखन व मिश्री का भोग लगाया गया।
ठाकुर केशवदेव का हुआ पंचामृत अभिषेक
प्राचीन केशव देव मंदिर में सोमवती अमावस्या के उपलक्ष्य में सुबह ठाकुरजी के श्री विग्रह का सेवायत मुन्नी लाल गोस्वामी द्वारा मंत्रोच्चारण के बीच पंचामृत अभिषेक कराया गया। ठाकुरजी को नई पोशाक धारण कराई गई और भव्य शृंगार के पश्चात भगवान की भव्य आरती उतारी गई। शाम को मंदिर कमेटी एवं श्री कृष्ण सामूहिक संकीर्तन मंडल के सदस्यों द्वारा मंडल द्वारा हरि नाम कीर्तन का आयोजन किया गया। वृंदावन के संत महात्माओं द्वारा हरिनाम कीर्तन किया गया। संकीर्तन 2 घंटे तक चलता रहा। इस मौके पर सोहनलाल शर्मा, सुरेश अग्रवाल, महेश गोयल, रमन लाल गुप्ता, महेश, नारायण प्रसाद आदि मौजूद थे।