उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान की नई पहल के तहत विवि के छात्र पशु स्वास्थ्य के लिए निर्मित आयुर्वेदिक दवाओं पर भी शोध कर सकेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय ने आयुर्वेट कंपनी के साथ अनुबंध किया है।
इसके लिए गुरुवार को विवि प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. एसी वार्ष्णेय ने कहा कि बदलते परिवेश में छात्रों को नवीन चुनौतियों के साथ पीपीपी मोड में अपने शोध कर पशुपालक और किसानों को लाभ पहुंचाना होगा।
इसके लिए आयुर्वेट कंपनी ने विश्वविद्यालय के शोध में सहयोग के लिए हाथ बढ़ाया है, जो पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण पर विशेष कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि मानव के साथ पशुओं को स्वस्थ रखना चुनौती भरा हो गया है।
ऐसे में उन्नत तकनीक से कृत्रिम गर्भाधान, वर्मी कंपोस्ट, हाइड्रोनिक्स, हरा चारा, बायोगैस प्लांट से गैस और खाद तैयार करना, मछली पालन, मुर्गी पालन वैज्ञानिक विधि से करना आवश्यक हो गया है।
आयुर्वेट के प्रबंध निदेशक डा. एमजे सक्सेना ने कहा कि आयुर्वेट कंपनी पशु की संपूर्ण स्वास्थ्य रक्षा के लिए संकल्पित है। इस दिशा में विवि में हो रहे नवीनतम शोधों पर आयुर्वेट हर प्रकार का सहयोग करेगी।
डा. सक्सेना ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के बद्दी में पशु स्वास्थ्य के दर्जनों प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं। वर्तमान मौसमी बदलाव में वह विवि के साथ मिलकर इस दिशा में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने विवि के इस एमओयू के लिए कुलपति का आभार व्यक्त किया।
आयुर्वेट एवं विवि के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर होने के अवसर पर विवि की ओर से निदेशक शोध डा. अतुल सक्सेना, डीन कालेज ऑफ वेटरनेरी साइंस डा. सतीश कुमार गर्ग, निदेशक प्रसार डा. सर्वजीत यादव, निदेशक गौ अनुसंधान संस्थान डा. शरद यादव,
निदेशक फार्म डा. अजय प्रकाश, डीन बायोटेक डा. राजेश निगम, निदेशक क्लीनिक डा. आरपी पांडेय, डिप्टी रजिस्ट्रार डा. ब्रजेश यादव, आयुर्वेट की ओर से कार्यकारी निदेशक डा. अनूप कालरा, सीईओ डा. के रविकांत आदि उपस्थित रहेे।