आदर्श लोहिया और सांसद आदर्श गांव की भांति जनपद में दो जल गांव भी विकसित किए जाएंगे। इन गांवों में मूलभूत सुविधाओं के साथ अन्य विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं में उपलब्ध संसाधनों का ही प्रयोग किया जाना है।
केन्द्र सरकार ने जल गांव के तहत प्रदेश के 300 गांवों के विकास का फैसला किया है। इन गांवों का चयन यहां जल संबंधी समस्याओं को देखते हुए किया गया है। इसमें मथुरा के दो गांव चयनित हैं। ये गांव छाता तहसील के हैं। खारे पानी की समस्या से जूझ रहा गांव अगरयाला और जलभराव से प्रभावित रहने वाला गांव सिरथला।
स्थानीय अधिकारियों को मौजूदा संसाधनों से ही इन गांवों का विकास करने का जिम्मा सौंपा गया है। नोडल अफसर जनपद में डीआरडीए के परियोजना निदेशक को बनाया गया है। उन्हें सांसद आदर्श गांव, लोहिया आदर्श गांव और अंबेडकर गांव की भांति विकसित करना है।
यहां पशु चिकित्सा, मानव चिकित्सा, जल निकासी, पेयजल व्यवस्था, सड़क और नाली, शौचालय, शिक्षा, सिंचाई आदि की व्यवस्थाएं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं में मौजूदा संसाधनों से ही करनी हैं।
केन्द्र सरकार ने पिछले साल अगस्त माह में इन दोनों गांवों का चयन करते हुए डीएम को आदेशित किया था। अब इन दोनों गांव का सर्वे कर जरूरतों की जानकारी की जा रही है। हाल ही में केन्द्र सरकार के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण के सचिव ने इन दोनों ही गांव के विकास की रिपोर्ट मांगी है।
अगरयाला
यह गांव तहसील छाता के ब्लाक चौमुंहा में है। यहां खारे पानी की प्रमुख समस्या है। यहां पेयजल, सड़क, सिंचाई, पशु व मानव चिकित्सा के लिए कोई सुविधा नहीं है। अकबरपुर-शेरगढ़ मुख्य मार्ग से करीब ढाई किलोमीटर दूर स्थित इस गांव को जाने के लिए कच्ची पगडंडी है।
सिरथला
यह गांव तहसील छाता के ब्लाक नंदगांव के अंतर्गत स्थित है। यह डूब क्षेत्र के गांवों में शामिल है। यहां भी जनसुविधाओं का पूर्णत: अभाव है। यह कोसी-नंदगांव रोड पर करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।