राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने काशी और अयोध्या के बाद अब भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा की रचना भी महानगर के रूप में कर दी है। इसमें गोकुल के साथ छह नगर बनाए गए हैं, जहां संघ की योजनाओं को धार्मिक नगरी की दृष्टि से धार दिए जाने का कार्य किया जा रहा है।
मथुरा आरएसएस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। इस शहर को संघ के काशी, अयोध्या और मथुरा के एजेंडे के रूप में देखा जाता है। यहां संघ अब अपनी नींव मजबूत करने की योजना के तहत नए सिरे से काम कर रहा है। इसके लिए मथुरा को महानगर के रूप में मानते हुए इसमें छह नगर बनाए गए हैं।
संघ के मथुरा महानगर में शहर के दीनदयाल नगर, माधव नगर, यमुना नगर, केशव नगर, श्रीजी नगर शामिल हैं। इसके अलावा गोकुल को भी महानगर में शामिल किया गया है।
संघ की योजना अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर देशव्यापी अभियान के तहत 2025 तक गांव-गांव और बस्ती-बस्ती में शाखाएं लगाते हुए प्रत्येक वर्ग में पहुंचने की है। इसी रणनीति के तहत संघ नवगठित मथुरा महानगर में पहली बार पांच स्थानों पर नगर सहसम्मिलत कार्यक्रम 31 जनवरी को आयोजित करने जा रहा है। इसमें संघ के प्रांतीय पदाधिकारी भी शामिल होंगे।
महानगर की 64 बस्तियों में 300 शाखाओं का साप्ताहिक कार्यक्रम बनाया गया है। जहां 6 से 14 फरवरी तक शाखाएं लगाने की योजना है। इसके संदर्भ में महानगर प्रचारक विशाल ने संघ से जुडे़ पदाधिकारियों के साथ शुक्रवार को बैठक की।