नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को अब मथुरा-वृंदावन के यमुना में गिर रहे नालों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही पालिका और प्रशासन के अफसरों कीलापरवाही से भी अवगत कराया जाएगा। यमुना प्रदूषण के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे याचियों ने अपील दायर करने की तैयारी कर ली है।
यमुना में प्रदूषण दूर करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों को अनसुना कर रहे अफसरों पर लगाम लगाने की एक और कोशिश की जा रही है। इसमें पर्यावरण पर लंबे समय से काम कर रहे वृंदावन के मधुमंगल शुक्ला अब एनजीटी में नालों को यमुना में गिरने से रोकने की पहल करने जा रहे हैं।
इसकी याचिका वह पांच मार्च की सुनवाई के दौरान एनजीटी में दाखिल करेंगे। इस दिन उनकी याचिका पर वृंदावन में यमुना किनारे कूड़े निस्तारण के संदर्भ में सुनवाई होनी है। एनजीटी के आदेश पर वृंदावन पालिका ने पागल बाबा मंदिर के निकट स्थित टंचिंग ग्राउंड पर कूड़ा निस्तारण का प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया है।
हालांकि इस प्रस्ताव पर आपत्ति लगा दी गई है, जिसका कारण यहां करीब ढाई सौ से अधिक डूडा द्वारा बनाए गए आवास हैं। प्लांट की स्थापना से यहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इधर, मथुरा शहरी क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना को लेकर एनजीटी में याचिका गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने दायर कर दी है। इस पर भी सुनवाई होनी है। गौरतलब रहे कि मथुरा-वृंदावन शहरी क्षेत्र के सभी नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं।
दोनों ही पालिकाओं ने एसपीएस और एसटीपी संचालन पर चुप्पी साध ली है। यहां तक कि प्रशासनिक अफसरों के निरीक्षण में भी नाले यमुना में सीधे जाते देखने के बाद भी इन्हें नियंत्रित करने के प्रयास किसी स्तर से नहीं किए गए हैं।