- 4563 मतदाताओं नहीं पसंद आया कोई भी प्रत्याशी, लोकसभा चुनावों में वर्ष 2014 में लाया गया था नोचा का विकल्प
अमर उजाला ब्यूरो
मथुरा। नोटा यानी ''''इनमें से कोई नहीं''''। लोकसभा चुनावों में वर्ष 2014 से शुरू हुए इस प्रयोग ने मतदाताओं को एक और विकल्प दिया। कान्हा की नगरी में वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 1953, वर्ष 2019 के चुनाव में 5800 मतदाताओं ने इसका प्रयोग किया। इस बार के चुनाव में 4563 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। नोटा चुनावी अंकगणित में पांचवें पायदान पर रहा।
वर्ष 2014 के चुनाव में मथुरा लोकसभा सीट पर 21 प्रत्याशी थे। तब पहली बार लोकसभा चुनाव में प्रयोग किया गया नोटा 14 वे नंबर पर रहा था। वहीं साल 2019 के चुनाव में 5800 लोगों ने नोटा का प्रयोग किया। तब चुनाव मैदान में 14 प्रत्याशी थे। नोटा सभी निर्दलियों को पीछे छोड़कर चौथे पायदान पर पहुंच गया था। तब सिर्फ राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशी ही इससे आगे निकल सके। इनमें में सांसद हेमामालिनी, रालोद के प्रत्याशी कुंवर नरेंद्र सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी महेश पाठक शामिल रहे। इस चुनाव में 15 प्रत्याशियों ने अपना भाग्य आजमाया। इनमें से भाजपा प्रत्याशी हेमामालिनी, कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश धनगर, बसपा प्रत्याशी सुरेश सिंह और निर्दलीय प्रत्याशी भानु प्रताप ही नोटा को पछाड़ सके। इस तररह नोटा पांचवें नंबर पर रहा। अन्य 11 प्रत्याशी नोटा से भी कम वोट ले सके।