मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के पहले तहसील दिवस में मंगलवार को अफसर नहीं पहुंचे। जिला भर में 40 अफसर तहसील दिवस में अनुपस्थित रहे। जिस तहसील दिवस में अधिकारी पहुंचे भी थे वहां शिकायतों का निस्तारण शून्य रहा। फरियादी भी निराश होकर लौट गए। लोगों का कहना था कि उन्हें उम्मीद थी कि नई सरकार का पहला तहसील दिवस है, लिहाजा सभी अफसर रहेंगे लेकिन यहां तो पुराना ढर्रा ही नजर आ रहा है।
मंगलवार को सभी तहसीलों पर तहसील दिवस का आयोजन हुआ। सुबह से ही फरियादी अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे लेकिन उनका समाधान करने वाले अधिकारी पहुंचे ही नहीं। अमर उजाला की टीम ने जब तहसील दिवसों का जायजा लिया तो हालात वाकई बेहद खराब दिखे। कोई फरियादी सौ रुपये किराए में खर्च करके पहुंचा तो कोई पचास रुपये। सभी को निराश लौटना पड़ा।
मथुरा सदर: होशियार सिंह, गंगासहाय, दीपक गुप्ता, कलावती, सोहन सिंह अपनी समस्या लेकर सुबह को आठ बजे पहुंच गए थे। किसी को पेंशन चाहिए थी तो किसी के घर हुई चोरी का खुलासा नहीं हो रहा था। यहां एडीएम फाइनेंस रविंद्र कुमार पहुंचे थे। जब शिकायतों की सुनवाई शुरू हुई तो पता चला कि संबंधित विभागों के अफसर ही नहीं हैं। यहां 12 अधिकारी नहीं पहुंचे। फरियादी निराश होकर लौट आए।
गोवर्धन: दाऊजी शर्मा अपने साथ करीब दस लोगों को लेकर पहुंचे। इनकी शिकायत है कि सड़क किनारे जो नाली बनवाई जा रही है, वह सही नहीं है। तहसीलदार ने शिकायतों को सुना। यहां भी करीब 8 अफसर नहीं पहुंचे। पेंशन, बिजली और पुलिस से संबंधित शिकायतों को लेकर लोग आए और निराश लौट गए।
मांट: एसएसपी मोहित गुप्ता और सीडीओ मनीष वर्मा तहसील दिवस में पहुंचे। यहां 106 लोगों ने पहुंचकर शिकायत की। राशन से संबंधित शिकायत सबसे ज्यादा थीं। केवल छह शिकायतों का ही निस्तारण हो सका है। यहां भी जिला स्तरीय कई अधिकारी अनुपस्थित थे।
महावन: प्रहलाद किशोर, राजू शर्मा, दुष्यंत चौधरी अपने साथियों के साथ पहुंचे। यह लोग गांव की सड़क निर्माण की मांग कर रहे थे। संबंधित विभागों के अफसरों के अनुपस्थित रहने के कारण इनकी बात सुनी नहीं जा सकी। एडीएम प्रशासन अजय अवस्थी ने बताया कि 44 शिकायत आईं, जिनमें से कई का निस्तारण किया गया।