जिले में आठ साल से हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई है। डीजीपी, आईजी, डीआईजी और पुलिस कप्तान के आदेशों के बाद भी कई थानों के हिस्ट्रीशीट रजिस्टर में तो आठ साल से रिमार्क नहीं लिखा गया है। ऐसे में हिस्ट्रीशीटर बेखौफ होकर अपराध और अपराधियों का बढ़ावा देने में जुटे हैं।
बता दें कि जिले के 21 थाना क्षेत्रों में 1123 हिस्ट्रीशीटर दर्ज हैं। ये सभी लूट, हत्या, चोरी, रोड होल्डअप, शराब के अवैध कारोबार, जमीनों पर अवैध कब्जा और चौथ वसूली की वारदातों में संलिप्त रह चुके हैं। इन पर नियंत्रण के लिए डीजीपी स्तर से हर माह हिस्ट्रीशीटरों पर निगरानी के आदेश दिए गए थे। कई बार तो यह कार्य 15 दिन का अभियान चलाकर भी करने को कहा गया।
इसमें हिस्ट्रीशीटरों की आमदनी का जरिया, उनके उठने-बैठने का स्थान, रहन-सहन का स्तर, लोगों से मिलने-जुलने की गतिविधि आदि पर निगरानी रखने और इसे हिस्ट्रीशीट (एचएस) रजिस्टर में रिमार्क सहित दर्ज करना शामिल था।
यह काम थानाध्यक्ष और बीट दरोगा प्राप्त इनपुट के आधार पर करते हैं लेकिन जिले के थानों में ऐसा नहीं किया गया। क ई थाने तो ऐसे हैं जहां आठ साल से एचएस रजिस्टर में एक भी रिमार्क नहीं लिखा गया है। अब वरिष्ठ अधिकारियों की सख्ती के बाद हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी तेज की जा रही है।
हिस्ट्रीशीटराें की निगरानी के लिए थाना स्तर पर कार्य नहीं किया गया है। सभी थानों से एचएस रजिस्टर मंगाकर एसपी देहात से पड़ताल कराई जा रही है। शेरगढ़ थाने में आठ साल से कोई रिमार्क नहीं है। दोषी थानाध्यक्षों पर कार्रवाई की जाएगी।
डा. राकेश सिंह
एसएसपी