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ठाकुर जी को प्रस्तुत की राग सेवा

Wed, 10 Dec 2014 12:15 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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ठाकुर राधारमण मंदिर का प्रांगण में चल रहे शीतकालीन निकुंज सेवा महोत्सव में मंगलवार को सुप्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना पद्मभूषण शोवना नारायण ने कत्थक की प्रस्तुति दी। उन्होंने शुरुआत विष्णु वंदना से की। इसके बाद कत्थक का शुद्ध रूप प्रस्तुत किया।
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गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो..., जै जै राधारमण हरि गोविंद बोलो..., जय जय राधारमण हरिबोल..., यशोदा हरि पालनै झुलावै...। भजनों पर  भंगिमाओं के साथ प्रस्तुति ने सभी को प्रभावित किया। तबले पर पंडित हरिमोहन शर्मा, सितार पर विजय शर्मा और गायन पर माधव प्रसाद ने संगत की।
जगद्गुरु पुरुषोत्तम गोस्वामी महाराज के सानिध्य में मनाए जा रहे इस दिव्य महोत्सव में ठाकुरजी प्रतिदिन भक्तों को अद्भुत शृंगार में दर्शन दे रहे हैं।  सभी आगंतुकों का स्वागत सेवायत वेणुगोपाल गोस्वामी और अभिनव गोस्वामी ने किया। शयन आरती सुवर्ण गोस्वामी ने की। आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि ठाकुरजी को प्रमुख सेवा राग सेवा, भोग सेवा और शृंगार सेवा है। ठाकुर राधारमण लाल को शीतकालीन निकुंज सेवा महोत्सव के दौरान यह तीनों सेवाएं विशेष रूप से प्रदान की जा रही हैं। यही कारण है कि ठाकुरजी के दर्शन श्रद्धालुओं को नित्य ही अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
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वृंदावन में होती है रस की प्राप्ति: शोवना नारायण
वृंदावन। गुरु कुंदन लाल और पंडित बिरजू महाराज से कत्थक कला को मांझ चुकी शोवना नारायण ने पत्रकारों को बताया कि कत्थक में जयपुर, लखनऊ और बनारस घरानों में प्रत्येक घराने की अपनी शैली और अंदाज है। यह सब वहां की भौगोलिक, राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप होता है। उन्होंने कहा कि वृंदावन ठाकुरजी की भूमि है। यहां ठाकुरजी आज भी रास रचाते हैं। इसकी भूमि में आने पर रस की प्राप्ति होती है और मन को शांति मिलती है।
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