मथुरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में प्रदेश मंत्रिपरिषद ने बुधवार को मथुरा को बड़ा तोहफा देते हुए पिछले 14 साल बंद पड़ी छाता चीनी मिल के नवीन निर्माण को स्वीकृति दी दी है। नई मिल 3000 टीसीडी क्षमता की होगी। इसके साथ ही 60 किलो लीटर प्रति दिन (केएलपीडी) क्षमता की डिस्टलरी एवं लॉजिस्टिक हब-वेयरहाउसिंग कॉम्पलेक्स की स्थापना भी होगी। पूरी परियोजना पर 47846.85 लाख रुपये की लागत आएगी। इस मिल के बनने से करीब सवा लाख किसान लाभान्वित होंगे और सैकड़ों स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
हाल ही मथुरा आए मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ को चीनी मिल एवं गन्ना विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने छाता चीनी मिल का वादा याद दिलाया था। यह चीनी मिल वर्ष 2009 से बंद पड़ी है। वर्ष 1978 में 1250 टीसीडी क्षमता की इस मिल की स्थापना की गई थी। वर्ष 1994 में इसका क्षमता विस्तार 2500 टीसीडी किया गया। वर्ष 2009 में पर्याप्त गन्ने की उपलब्धता न हाेने एवं लगातार घाटा होने के कारण इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद अधिकतर मशीनरी काे अन्य इकाइयों में भेज दिया गया। बंद होने के कारण यह मिल जीर्ण शीर्ण स्थिति में पहुंच गई।
मिल के पास 43.3200 हेक्टेयर भूमि
छाता चीनी मिल राष्ट्रीय राजमार्ग- 19 पर रेलवे स्टेशन छाता से लगभग 500 मीटर की दूरी पर है। इस मिल के पास 43.3200 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है। कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने बताया कि मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए फैसले के तहत अब छाता चीनी मिल की भूमि पर 3000 टीसीडी क्षमता की नई चीनी मिल के अलावा 60 केएलपीडी क्षमता की डिस्टलरी एवं लॉजिस्टिक हब-वेयरहाउसिंग काम्प्लेक्स की स्थापना होगी। परियोजना की प्रस्तावित लागत 47846.85 लाख रुपये हैं। हालांकि 4 जून, 2007 को चीनी निगम की सभी मिलों के साथ छाता चीनी मिल के भी निजीकरण/विक्रय किए जाने का निर्णय हुआ था। अब इस शासनादेश को संशोधित किया गया है।