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Mathura News: मेहमान परिंदों को लुभाने के लिए तालाबों में बनेंगे आशियाने

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मथुरा। लघु सिंचाई विभाग ने प्रवासी पक्षियों के आगमन से पूर्व उनके लिए अच्छे पड़ावों पर रोकने की दिशा में कार्ययोजना तैयार की है। विभाग ने जनपद के 130 से अधिक तालाबों के बीच में टापू बनाने की योजना बनाई है, ताकि इन टापुओं पर प्रवासी पक्षी बसेरा बना सकें। मथुरा में जोधपुर झाल, आगरा में कीठम और भरतपुर में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी हर साल यहां पहुंचते हैं।
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जनवरी से लेकर मार्च तक हर साल बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी भारत आते हैं। इन विदेशी पक्षियों के लिए बेहतर पड़ाव या आश्रय स्थल बनाने के लिए जनपद के 130 से अधिक तालाबों में टापू बनाने के लिए सूची तैयार की गई है। भारत में आने वाले प्रवासी पक्षी अमूमन जनवरी से मार्च तक प्रवास करते हैं। वे किसी सरोवर के किनारे आने से कतराते हैं। ठंड के मौसम में विभिन्न तालाबों और सरोवरों का नजारा बेहद मनमोहक हो जाता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। मथुरा में जोधपुर झाल या फिर भरतपुर में केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान जाना पड़ता है।
जोधपुर झाल में बने छोटे-छोटे वेटलैंड पर प्रवासी पक्षी नॉर्दन पिनटेल, कॉमन टील, नोर्दन शोवलर, पाइड एवोसेट, केन्टिश प्लोवर, लिटिल रिंग्ड प्लोवर, रफ, ब्लैक-टेल्ड गोडविट, लिटिल स्टिंट, टैमिनिक स्टिंट, व्हाइट वेगटेल, यलो वेगटेल, कॉमन सेन्डपाइपर, बुड सेन्डपाइपर, कॉमन रेड शेन्क, स्पोटिड रेड-शेंक आदि सैकड़ो की संख्या में पक्षियों ने डेरा जमाया था। लघु सिंचाई अधिकारी बलवीर सिंह नागर ने बताया कि जनपद में 1-5 हेक्टेयर क्षेत्रफल के बीच के 169 तालाब हैं और 5-10 हेक्टेयर तक के 7 और 10 हेक्टेयर से अधिक का एक तालाब है। योजना में 1-5 हेक्टेयर तक के तालाबों का टापू बनाने के लिए 130 से अधिक तालाबों का चयन किया गया है। इन तालाबों के आसपास पक्षियों के प्रवास के लिए पेड़, पौधे और झाड़ीदार पौधे भी तैयार किए जाते हैं, ताकि इनमें प्रवासी घोंसले बना सकें।
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