इस दौरान कस्बे को आकर्षक रूप से सजाया जाएगा और जगह-जगह 'बंब' के नगाड़े गूंजेंगे।होली की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'पुष्प होली' होना है। जहाँ ब्रज में अन्य स्थानों पर रंगों का प्रयोग होता है, वहीं नौहझील में सैकड़ों कुंतल गुलाब के फूलों की पत्तियों से होली खेली जाती है। रंग-गुलाल केवल ठाकुर जी के समक्ष अर्पित किया जाता है, जिससे श्रद्धालु नए कपड़े पहनकर भी इस उत्सव का आनंद ले पाते हैं।
मेला अध्यक्ष जवाहर कटारा ने कहा कि कार्यक्रम को दिव्य बनाने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। आयोजन स्थल रामलीला मैदान में पुष्प वर्षा के बीच मुख्य लठामार होली का आयोजन होगा।बैठक की अध्यक्षता छीतरमल पाठक एवं संचालन अनिल शर्मा ने किया।समिति के अन्य पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बैठक में मुख्य रूप से पूरन पाठक (संरक्षक), मुन्नीलाल पाठक, अशोक भारद्वाज, महासचिव जैकम पाठक, कोषाध्यक्ष विजय पाठक, संतोष भारद्वाज, दिनेश पाठक, जगन्नाथ पाठक, मुकेश अग्रवाल, बल्ला पाठक, विजेंद्र पाठक, कंचन सोनी, छत्तर मास्टर, ईश्वर चंद पाठक और छोटू पाठक सहित अन्य प्रमुख लोग उपस्थित रहे।