अंगिरस सेवा संस्थान की ओर से आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय की मांग उठाई। कहा कि ये समय की मांग है। ‘आधुनिक परिवेश में स्वास्थ्य देखरेख’ विषय पर पर तिलकद्वार धर्मशाला सभागार में आयोजित सेमिनार में 17 राज्यों के पांच सौ से अधिक छात्र, विशेषज्ञ शामिल हुए।
वैज्ञानिक समिति के अध्यक्ष काशी हिंदू विवि के प्रो. एचएच अवस्थी ने बताया कि सेमीनार के आयोजन का मकसद आयुष की सभी चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद, होम्योपैथिक, योग, यूनानी पद्धतियों का समन्वय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष मिशन के तहत ये प्रयास शुरू किए हैं।
उन्होंने बताया कि सेमीनार के प्रथम चरण में अकादमिक गतिविधियां, द्वितीय चरण में सांस्कृतिक प्रस्तुति और आखिरी चरण में टूरिज्म डेवलपमेंट के लिए ब्रज के मंदिरों का छात्र-छात्राओं को भ्रमण कराया जाएगा।
सेवा संस्थान के सचिव राजेश शर्मा ने बताया कि सेमीनार में 300 से अधिक डेलीगेट्स और दो सौ से अधिक छात्र-छात्राएं प्रतिभाग कर रहे हैं। इसमें दो सौ से अधिक छात्रों ने शोध पत्र पढ़े।
सेमिनार में प्रो. मंजरी द्विवेदी, आयुर्वेद विवि उत्तराखंड के उपकुलपति प्रो. एसपी मिश्रा, लखनऊ विवि से प्रो. वाईडी शुक्ला, कमांडेंट आरपीएफ मनोज शर्मा आदि ने विचार रखे। सेवा संस्थान की अध्यक्षा रमा चतुर्वेदी ने आभार जताया। नितिन बंसल, राघवेंद्र शर्मा, गौरीशंकर, उजमा खान आदि उपस्थित रहे। सांसद हेमामालिनी ने आयोजकों और प्रतिभागियों को शुभकामना संदेश भेजा।
सांस्कृतिक प्रस्तुति ने लिया मोह
मथुरा। राष्ट्रीय सेमीनार में छात्र-छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सभी को प्रभावित किया। नृत्य, संगीत के साथ फैशन शो का मिश्रण सभी ने पसंद किया।
सेवानिवृत्ति पर राष्ट्रीय सेमिनार
राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी आरके अवस्थी के सेवानिवृत्ति के अवसर किया गया। जिला होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी नरेंद्र सारस्वत ने उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान कर शाल ओढ़ाई।