वृंदावन के ठा. बांकेबिहारी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद नंदोत्सव की धूम रही और बधाई गीतों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। सेवायतों ने श्रद्धालुओं पर टॉफी, चॉकलेट और खिलौने लुटाए, इसके बाद हल्दी-केसर मिश्रित दही की ‘लाला की छीछी’ पाने के लिए भक्त उमड़ पड़े।
यशोदानंदन के धरा पर अवतरण की खुशी में ठा. बांकेबिहारी मंदिर सहित देवालयों में नंदोत्सव की धूम रही। लल्ला के जन्मदिन की खुशी में मंदिर में बधाई गीत गूंजते रहे। श्रद्धालु नंदोत्सव के उल्लास में झूमते नजर आए। महिलाओं ने बधाई गीतों पर जमकर नृत्य किया और पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस में डूबा रहा।
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नंदोत्सव के दौरान सेवायतों ने मंदिर से टॉफी, चॉकलेट और खिलौने लुटाए। उपहार पाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मच गई। जैसे ही सेवायतों ने प्रसाद और उपहार लुटाए, उन्हें पाने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। इसके बाद सेवायतों ने हल्दी और केसर मिश्रित दही लुटाया। लाला की छीछी लेने के लिए हर कोई आतुर नजर आया। श्रद्धालु इसे भगवान के बाल स्वरूप की कृपा और प्रसाद मानकर पाने के लिए लालायित रहे।
मंदिर में नंदोत्सव के दौरान बधाई गीतों और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं के चेहरे पर लल्ला के जन्मदिन की खुशी साफ झलक रही थी। ठा. बांकेबिहारी मंदिर के अलावा वृंदावन के प्राचीन राधादामोदर मंदिर में भी नंदोत्सव धूमधाम से मनाया गया। यहां भी भगवान के बाल स्वरूप की खुशी में श्रद्धालुओं ने बधाई गीत गाए और नृत्य कर आनंद मनाया। मंदिर परिसर में दिनभर उत्सव का माहौल बना रहा।