देवशयनी एकादशी पर करीब 10 लाख श्रद्धालुओं ने गोवर्धन पहुंचकर गिरिराजजी की परिक्रमा की। देश विदेश से पहुंचे भक्त गोवर्धन के जयकारों के साथ जब निकले तो ऐसा लगा कि मानो आस्था का समुंदर उमड़ पड़ा हो।
चाहे 70 साल के रामकिशोर हों या 10 साल का मुकुल। हर किसी का उत्साह देखते ही बनता था। दिन भर होने वाली बरसात से परिक्रमा मार्ग में पानी भरा रहा लेकिन भक्त सारी बाधाओं को दूर करते हुए सप्त कोसी परिक्रमा पूरी कर रहे थे।
मुड़िया पूर्णिमा मेला शुक्रवार को विधिवत रूप से शुरू हो गया। भोर से ही परिक्रमा मार्ग पर भक्तों की भीड़ नजर आने लगी थी। सुबह जब बरसात शुरू हुई तो लगा कि भीड़ कम हो जाएगी लेकिन आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि थम ही नहीं पाया।
भगवान कृष्ण के जयकारों के साथ निकले श्रद्धालुओं के चेहरे पर न कोई थकान थी और न ही राह में आने वाली बाधाओं की कोई पीड़ा। नंगे पैर चले ही जा रहे थे।
दिल्ली के वसंतकुंज से पहुंचे 70 वर्षीय रामकिशोर ने बताया कि पहले तो लग रहा था कि परिक्रमा नहीं कर पाएंगे।
यहां आते ही ऐसी हिम्मत आ गई कि सात कोस की परिक्रमा कब पूरी कर ली पता ही नहीं चला। पलवल निवासी देवकी भी अपने पोते के साथ पहुंची थीं। बोलीं, गिरिराज महाराज ने ऐसी हिम्मत दी कि रास्तें में पड़े कंकड़ भी फूल जैसे लगने लगे। गाजियाबाद के कवि नगर से आस्था, दुष्यंत, पिंकू और केशव अपने परिवार के साथ पहुंचे थे।
घर वाले भले ही पीछे रह जाते थे लेकिन यह बच्चे भागकर आगे निकल जाते। बोले, बड़ा मजा आ रहा है। ऐसा लग ही नहीं रहा कि यहां रात होगी भी। चारों तरफ दुकानें सजी हैं। रात को नौ बजे तक गोवर्धन के रास्ते भक्तों की भीड़ से फुल हो गए थे।
पहले दिन दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा और जम्मू तक से भक्त पहुंचे। रात तक लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी था। माना जा रहा है कि शनिवार और रविवार को संख्या और बढ़ जाएगी।