टीका टीक दोपहरी, तपती सड़क, शरीर पसीने से तरबतर बदन और मुंह से निकल रहे बस ये बोल..तेरे माथे मुकट बिराज रह्यौ, मेरे गोवर्धन महाराज..., गिर्राजधरण हम आपकी शरण...। पग-पग पर इस अटूट आस्था के आगे मानो भगवान सूर्य नारायण भी नतमस्तक हो गए। तपती सड़क पर आस्था के पग ठहरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं।
गोवर्धन में पांच दिवसीय मुड़िया पूर्णिमा के मेले के पहले ही दिन श्रद्धालुओं की भीड़ सात कोसीय परिक्रमा के लिए उमड़ पड़ी। सोमवार को दोपहर एक बजे श्रद्धालु बड़ी परिक्रमा की शुरुआत दंडवती परिक्रमा के साथ करते देखे गए। उत्साह का आलम ऐसा है कि बुजुर्ग, बच्चे और युवा भी इस पुण्य को अर्जित करने को लालायित हैं।
नजफगढ़, दिल्ली से आए युवा रविंद्र ने जैसे ही परिक्रमा की शुरुआत की तो पैर तपती सड़क पर जलने लगे। फिर गिर्राजधरण का नाम लिया और दंडवत प्रणाम किया। इसके बाद तो मानो उन्हें ऊर्जा मिल गई। रविंद्र के साथ उनकी छह साल की बेटी खुशबू भी थीं। रविंद्र ने बताया कि वे सपरिवार आए हैं। वो अभी पीछे चल रहे हैं।
पंजाब के भटिंडा जिले से आईं जेसिका परिक्रमा में परेशानियों के सवाल पर बोलीं यहां कष्ट उठाने के लिए ही तो हम आए हैं। यहां कण-कण में भगवान श्रीकृष्ण के रूप गिर्राज महाराज बसते हैं। ये आनंद की अनुभूति कराते हैं। आन्यौर की तरफ चलते ही साधु, भिक्षुकों की कतार, भजन संकीर्तन के स्वर और जनसेवकों द्वारा लगाए गए भंडारे, शीतल पेयों की स्टॉलों पर सेवा का भाव आपका मन मोह लेगा। यहां पग-पग पर जल, जलपान, शीतल पेय, प्रसाद के वितरण के लिए होड़ मची है। हर कोई श्रद्धालुओं की सेवा कर पुण्य हासिल करने की होड़ में है। शाम होते ही श्रद्धालुओं की भीड़ रेले की शक्ल लेने लगी।