जन-जन की आराध्य यमुना की धारा को हथिनीकुंड से मुक्त कराने के लिए यमुना भक्तों ने कमर कस ली है। इस बार इस ऐतिहासिक आंदोलन का गवाह कोसीकलां का अनाज मंडी परिसर बनेगा। यहीं पर यमुना की मुक्ति के लिए किसानों की महापंचायत होगी। अगले दिन बड़ी संख्या में किसान, ब्रजवासी और पुष्टिमार्गीय अनुयायी दिल्ली के लिए कूच करेंगे।
वर्ष 2011 में सुलगी यमुना को प्रदूषण से मुक्त कराने की चिंगारी एक बार फिर 15 मार्च को जनसमूह के रूप में परिलक्षित होगी। इस आंदोलन को धार देने में जुटे यमुना मुक्तिकरण अभियान के राष्ट्रीय संयोजक राधाकांत शास्त्री ने बताया कि अभियान को जन-जन का आंदोलन बनाने के लिए बीते एक साल से गांव-गांव प्रचार किया जा रहा है।
किसानों को बताया जा रहा है कि जिस तरह यमुना के जल में रासायनिक कचरा, गंदगी उड़ेली जा रही है उससे उनकी खेती जहरीली हो रही है। भूगर्भ जल दूषित होने के चलते कैंसर, त्वचा रोग, लीवर संबंधी गंभीर बीमारियां लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही हैं।
राष्ट्रीय सहसंयोजक सुनील सिंह ने बताया हाल ही में इलाहाबाद में लगे माघ मेले में किसानों की पंचायत में यमुना मुक्तिकरण अभियान का संदेश पूरे देश के किसानों को मिल चुका है। अब 18 फरवरी को दिल्ली तक वाहन रैली निकाली जाएगी। एक मार्च को लखनऊ में आयोजित भारतीय किसान यूनियन कोर कमेटी की बैठक में किसानों को आंदोलन की रूपरेखा समझाई जाएंगी। 14 मार्च को कोसी अनाज मंडी परिसर में किसानों की महापंचायत में यमुना मुक्ति का संकल्प दिलाया जाएगा। 15 मार्च को यमुना मुक्ति के लिए भक्तों का कारवां दिल्ली कूच करेगा।