मथुरा में सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले 15 से अधिक कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरियां सील होने से हजारों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अग्नि सुरक्षा और अन्य मानक पूरे होने तक संस्थानों की सील नहीं खोली जाएगी।
कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरियों के खिलाफ प्रशासन की ताबड़तोड़ कार्रवाई से शहर के शिक्षा जगत में अफरा-तफरी का माहौल है। बेसमेंट और बिना पुख्ता सुरक्षा मानकों के चल रहे 15 से अधिक कोचिंग व लाइब्रेरियों को अब तक सील किया जा चुका है। इस सख्त रुख के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या ये संस्थान तय मानक पूरे कर दोबारा खुलेंगे या फिर इन्हें ऑनलाइन शिफ्ट कर दिया जाएगा। इस मुद्दे पर फिलहाल कोचिंग संचालक पूरी तरह मौन साधे हुए हैं।
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संकट में हजारों छात्रों का भविष्य
प्रशासनिक कार्रवाई के कारण हजारों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई अधर में लटक गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे प्रतिभागी बेहद परेशान हैं। छात्रों का कहना है कि उन्होंने भारी-भरकम फीस जमा की है, ऐसे में उनकी पढ़ाई के नुकसान का जिम्मेदार कौन है। कोचिंग संचालकों का तर्क है कि भवन की एनओसी और नक्शा पास कराने की जिम्मेदारी भवन स्वामी की है। इस खींचतान और संचालकों की चुप्पी के बीच प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जब तक अग्निशमन, निकास द्वार और सुरक्षा के कड़े मानक पूरे नहीं होंगे, सील नहीं खुलेगी।
जिलाध्यक्ष उप्र कोचिंग संघ लकी चौधरी का कहना है कि सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए संचालकों को कम से कम 3 महीने का समय दिया जाना चाहिए। अचानक की जा रही कार्रवाई से छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया हैं। कोचिंग जिन इमारतों में चल रही हैं, वहां फायर एनओसी व अन्य सुरक्षा मानक पूरे कराने की जिम्मेदारी भवन स्वामियों की हो न कि कोचिंग संचालकों की।
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जिला विद्यालय निरीक्षक राघवेंद्र सिंह ने बताया कि यदि किसी कोचिंग संस्थान ने फीस ले ली है और वह बच्चों को नहीं पढ़ा रहा है तो संबंधित छात्र या अभिभावक इसकी लिखित शिकायत प्रशासन से कर सकते हैं। आरोपी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।