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Mathura News: मानसून सिर पर, तब आई नालों से अतिक्रमण हटाने की सुध

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मथुरा। मानसून सिर पर आने पर नगर निगम को नालों की सफाई और उन पर हो रहे अतिक्रमण को हटाने की सुध आई है। नगर आयुक्त ने इस कार्य में निगम के 11 अधिकारियों की टीम लगाई है, जो कि नगर के नालों का निरीक्षण करने के साथ ही अपनी देखरेख में उनकी सफाई और अतिक्रमण हटवाने की कवायद में लगे हैं।
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नगर निगम की लंबे समय से अनदेखी के कारण नगर के अधिकांश नालों पर अतिक्रमण हो रहा है, जो कि नालों की सफाई में बाधक बन रहे हैं। सफाई कार्य करने वाली पोकलेन मशीन भी काम नहीं कर पा रही है। यह बात नगर निगम के अधिकारियों की टीम द्वारा विगत दिनों किए गए सर्वे में सामने आई है। मानसून सिर पर आने पर नगर निगम को शहर में होने वाले जलभराव, नालों के ओवर फ्लो होने की चिंता सताने लगी है।
इन समस्याओं से निपटने के लिए नगर आयुक्त ने निर्देश 11 अधिकारियों को इस कार्य में क्षेत्रवार लगाया है। इसमें अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार, रामजी लाल, सहायक नगर आयुक्त राकेश कुमार त्यागी, कल्पना सिंह चौहान, सीटीओ शिवकुमार गौतम, महाप्रबंधक जल अरुणेंद्र कुमार, एक्सईएन एसपी मिश्रा, राम कैलाश एई प्रशांत दीक्षित आदि टीम में शामिल हैं। इन अधिकारियों को मथुरा-वृंदावन में चिह्नित किए गए नालों की सफाई एवं उन पर हो रहे अतिक्रमण को हटाने की जिम्मेदारी दी गई है। इन अधिकारियों की देखरेख में बारिश के पानी की निकासी हो सके और ओवर फ्लो एवं जलभराव की समस्या हर बार की तरह पैदा न हो, इससे बचने के लिए तली झाड़ सफाई कार्य किया जा रहा है।
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अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार ने बताया कि बारिश में शहर में जलभराव की समस्या न हो और नालों से पानी की निकासी समुचित तरीके से हो सके। इसके लिए नालों की सफाई के साथ ही उन पर हो रहे अतिक्रमण को भी सख्ती से हटाया जा रहा है। 11 अधिकारियों को इस कार्य में लगाया गया है। जेसीबी के साथ मौके पर पहुंच कर कार्य करा रहे हैं।



नालों की ड्रोन कैमरे से की जाएगी वीडियोग्राफी

नगर निगम द्वारा मथुरा-वृंदावन के नालों की सफाई से पहले और सफाई हो जाने के बाद की स्थिति की वीडियोग्राफी ड्रोन कैमरे से की जाएगी। इस वीडियोग्राफी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाएगा। नगर आयुक्त शशांक चौधरी ने इस कार्य की जिम्मेदारी सैनीटेशन एक्सपर्ट रोहित वार्ष्णेय को दी है।





जनता भी कम जिम्मेदार नहीं

अधिकांश नालों को भवन स्वामियों द्वारा पाट रखा है। कुछ जगह तो नगर निगम द्वारा रखवाई गईं स्लैब दिख रही हैं, लेकिन तमाम स्थानों पर नाले पटे हुए हैं। पूर्व में नालों पर अतिक्रमण चिह्नित तो किए गए, मगर अधिकारी इसे हटाने का साहस नहीं जुटा सके। यही वजह है कि हर बार लोगों को जलभराव से जूझना पड़ता है। इस अतिक्रमण के लिए सीधे तौर पर जनता भी जिम्मेदार है।



10 लाख की आबादी की बढ़ रहीं धड़कन
जून मध्य के बाद मानसून आने की संभावना है। पिछले साल के हालात को देख जलभराव के दृश्यों को याद कर लोगों की धड़कन बढ़ रही हैं। भूतेश्वर और नया बस अड्डा अंडरपास से तो शहर जलभराव के कारण दो हिस्सों में बंट जाता है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि जाने वाला मुख्य मार्ग जलभराव से पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है। नगर निगम क्षेत्र में करीब 500 कॉलोनी और करीब 10 लाख आबादी है। जल निकासी के लिए शहर में कुल 72 नाले हैं। इनमें 13 बड़े, 23 मझले और 36 छोटे नाले हैं। पहले नालों की संख्या 98 थी। लेकिन, बाद में आकार बढ़ाकर इनकी संख्या कम कर दी गई। शहर का मुख्य 10 किलोमीटर लंबा भूतेश्वर-अंबाखार नाला है। यह वो नाला है, जिससे शहर का करीब 75 प्रतिशत भाग जुड़ा है। नगर निगम के उच्चाधिकारियों ने 30 जून तक नालों की सफाई का लक्ष्य रखा है।
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आंकड़ों पर एक नजर

72 छोटे-बड़े कुल नाले अब हैं नगर निगम क्षेत्र में, 98 थे पहले।

25 कर्मचारी लगाए गए हैं नालों की तली झाड़ सफाई में।

09 जेसीबी लगाई गई हैं नालों की सफाई कार्य में।

08 ट्रैक्टर-ट्रालियां लगाई गई सिल्ट हटाने के कार्य में।

500 से अधिक मोहल्ले क्षेत्र में व कॉलोनियां हैं।

300 टन कचरा प्रतिदिन शहरी क्षेत्र से निकलता।

30 से अधिक डंपिंग ग्राउंड हैं नगर निगम क्षेत्र में।
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