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तीर्थनगरी वृंदावन में बंदरों के उत्पात से लोग परेशान

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वृंदावन में मोबाइल हाथ में लिए बंदर। - फोटो : VRINDAVAN
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मथुरा। संसद में बृहस्पतिवार को सांसद हेमामालिनी ने कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन में बंदरों के उत्पात का मुद्दा उठाया। इस पर टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने भी वृंदावन आगमन के दौरान बंदरों के उत्पात से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। इस पर एलजेपी सांसद चिराग पासवान ने भी इस विषय को आगे बढ़ाया।
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संसद का शीतकालीन सत्र में बृहस्पतिवार को मथुरा की सांसद हेमामालिनी ने प्रश्नकाल के दौरान केंद्र सरकार का ध्यान अपने संसदीय क्षेत्र की ओर खींचा। उन्होंने मथुरा-वृंदावन में बंदरों की बढ़ती समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोग ही नहीं, ब्रज दर्शन को आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी परेशान हैं। बंदर कई लोगों को घायल कर चुके हैं।
धार्मिक क्षेत्र के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। केंद्र सरकार को इस समस्या का स्थाई समाधान खोजना चाहिए। सांसद के इस प्रश्न का टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वे वृंदावन के रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में जाते रहते हैं। उन्होंने भी बंदरों से उत्पन्न होने वाली समस्याओं का सामना किया है। उन्होंने बताया कि वृंदावन में किस तरह बंदर लोगों का चश्मा आदि सामान ले जाते हैं। इस पर एलजेपी सांसद चिराग पासवान ने भी दिल्ली के लुटियन जोन में बंदरों से उत्पन्न समस्या को रखा।
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राह चलते लोगों से छीन लेते हैं चश्मा, मोबाइल और पर्स
वृंदावन। वृंदावन के बंदरों को पर्यटक और श्रद्धालुओं के चश्मा, मोबाइल और पर्स बहुत पसंद हैं। इन्हें तो वे राह चलते लोगों से छीनकर ले जाते हैं। समस्या से बचने के लिए स्थानीय लोग पर्यटक और श्रद्धालुओं को चश्मा न लगाने और राह चलते समय मोबाइल से बात न करने की सलाह देते हैं। स्थानीय लोगों को भी बंदरों के उत्पात ने घरों में कैद कर दिया है।
वृंदावन में बंदरों की समस्या गंभीर है। इससे न सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां ठा. बांकेबिहारी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में के आसपास राहगीरों का चश्मा, पर्स, प्रसाद, महंगे मोबाइल छीन रहे हैं। देशी विदेशी भक्तों का सामान छीन ले जाने के साथ ही उन पर हमला भी कर रहे हैं।
मोहल्ला और कालोनियों में भी बढ़ता जा रहा है कपि उत्पात
मथुरा/वृंदावन। बंदरों का उत्पात सिर्फ वृंदावन तक सीमित नहीं है। मथुरा भी इस समस्या से जूझ रहा है। स्थानीय लोग अपने घरों में कैद होकर रह गए हैं। बच्चे व वृद्ध घरों से लाठियां साथ लेकर निकलते हैं। वृंदावन में बंदरों के कारण तीन महिला सहित पांच लोगों की मौत भी बंदरों के कारण हो चुकी है। मथुरा में भी दो लोगों की मौत का कारण बंदर बन चुके हैं। इस समस्या को लेकर आंदोलन भी हुए। लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
प्रतिदिन 55 लोगों को कर रहे घायल
वृंदावन के अस्पताल में बंदरों के काटने से घायल के उपचार के लिए पहुंचने वालों की संख्या करीब 50-55 तक पहुंच जाती है। इन्हें एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के स्वामी कृष्णा कालीनंद ने बताया कि प्रतिदिन 5 ऐसे लोग आते हैं, जिन्हें बंदरों ने घायल किया होता है।
- डॉ. केके गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला संयुक्त चिकित्सालय वृंदावन
क्या कहते हैं लोग....
बंदरों ने मां को मार डाला
बंदरों ने मेरी मां को मार डाला। वह दर्द मुझे आज भी है। बंदरों पकडने की बातें पिछले कई वर्ष से हो रही है, लेकिन प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं है। चुनाव में जन प्रतिनिधि इस समस्या के से निजात दिलाने का वादा लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन निदान नहीं हो रहा है।
- बालमुकुंद शास्त्री, वृंदावन
बंदरों ने किया था हमला
बंदरों ने उनपर तीन माह पूर्व हमला किया था। इससे वे जिंदगी की मौत के बीच झूलते रहे। बमुश्किल जान बची है। बंदरों के कारण बाजार में राहगीरों को सामान ले जाना भी मुश्किल हो रहा है। दुकानदारों को भी बंदरों से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
- अशोक अरोड़ा, वृंदावन
श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी
स्थानीय लोगों के साथ बंदरों से श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। वर्तमान में नगर की यह सबसे बड़ी समस्या है। सांसद ने इस मुद्दे को संसद में उठाया है, यह सराहनीय है।
- आशीष अग्रवाल, वृंदावन
प्रशासन इस पर नियंत्रण करे
यहां बंदर राहगीरों के चश्मा, पर्स, मोबाइल व प्रसाद ले जाता है। प्रशासन को इस पर नियंत्रण लगाना चाहिए, लेकिन शासन और प्रशासन ने इस ओर से पीठ कर ली है।
- प्रमोद अग्रवाल, वृंदावन
देश के लिए मथुरा बनेगा मॉडल
वृंदावन। आने वाले समय में बंदरों की समस्या से निजात दिलाने के मामले में मथुरा देश में मॉडल बनने जा रहा है। प्रास्तावित प्रोजेक्ट में बंदरों को मोहल्ला स्तर पर समूहों में पकड़कर उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। रेस्क्यू सेंटर में रखकर नसबंदी की जाएगी। इसके पश्चात प्राकृतिक सुरक्षित जगह पर उन्हें छोड़ा जाएगा। यह प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। यह जानकारी वन विभाग के क्षेत्र अधिकारी एमके मीणा ने दी।
21 हजार बंदर हैं मथुरा-वृंदावन में
वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल मथुरा-वृंदावन में 21 हजार बंदर हैं। इनमें से 2 हजार बंदरों को पकड़कर सुरक्षित बाह आगरा में सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की स्वीकृति नगर निगम को दी गई है। इसकी सहमति पिछले दिनों वेटरनेरी विवि में बंदरों पर आयोजित सेमिनार के दौरान वन विभाग द्वारा नगर निगम को दी गई है।
वृंदावन में ये हैं सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र
निधिवन, सेवाकुंज, दुसायत मोहल्ला, व्यास घेरा, अठखंबा, बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र, रंग जी मंदिर क्षेत्र, जयङ्क्षसह घेरा, लोई बाजार, गोविंद बाग, मोतीझील, रमणरेती, वनखंडी क्षेत्र, गौरा नगर आदि क्षेत्रों में बंदरों की बहुतायत है। गोविंद बाग, अठखंबा, मोतीझील, रमणरेती क्षेत्र में बंदरों के आतंक से कई मौतें हो चुकी हैं।

बांकेबिहारी मंदिर के निकट श्रद्धालु के चश्मे को तोड़ता बंदर।- फोटो : VRINDAVAN

वृंदावन में फ्रूटी पीता बंदर।- फोटो : VRINDAVAN

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