छाता। सेमरी गांव एक ऐसे सिद्ध शक्तिपीठ के रूप में प्रतिष्ठित है, जिसका आध्यात्मिक इतिहास हिमाचल के कांगड़ा (नगरकोट) से जुड़ा है। यह पावन स्थल भक्तों के अटूट विश्वास, मानवीय स्वभाव के एक क्षणिक संशय और मां के अनंत वात्सल्य की अनूठी कहानी कहता है। इसी भक्ति परंपरा को जीवंत रखते हुए, आज नरी सेमरी देवी मंदिर में आगरा से आए भक्तों द्वारा तीज की चमत्कारी आरती का भव्य आयोजन किया जाएगा।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आगरा निवासी और मां के परम भक्त ध्यानू भगत ने हिमाचल के कांगड़ा (नगरकोट) में देवी को प्रसन्न किया था। मां उनकी भक्ति से द्रवित हुईं और उनके साथ चलने को तैयार हो गईं, लेकिन उन्होंने एक कठोर शर्त रखी। कहा कि मैं तुम्हारे पीछे-पीछे चलूंगी, लेकिन तुमने पीछे मुड़कर देखा, तो मैं उसी स्थान पर ठहर जाऊंगी।
ध्यानू भगत मां की पदचाप सुनते हुए आगे बढ़ते रहे, लेकिन जैसे ही वे छाता के पास सेमरी पहुंचे तो किन्हीं कारणों से पीछे मुड़कर देख लिया। शर्त भंग होते ही मां अंतर्ध्यान हो गईं। बाद में, इसी स्थान पर जंगल के बीच मां का दिव्य विग्रह (मूर्ति) प्रकट हुआ, जिसकी महिमा आज चारों ओर फैली है।
तीज की चमत्कारिक आरती इस मंदिर की विशिष्ट पहचान है। परंपरा की सबसे विशेषता यह है कि आज भी ध्यानू भगत के वंशज आगरा से विशेष रूप से यहां अपनी हाजिरी लगाने आते हैं। मंदिर के पुजारी नत्थी सिंह ने बताया कि आज शनिवार को आगरा वाले तीज की विशेष आरती करेंगे। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जय माता दी के उद्घोष से गुंजायमान रहेगा।