मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान प्रकरण में 13.37 एकड़ जमीन पर दावे को लेकर चल रहे विवाद में ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष डॉ. जहीर हसन के हस्तक्षेप के बाद सभी पक्षों की प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। इधर, अध्यक्ष ने लखनऊ से लौटने के बाद ईदगाह कमेटी के सदस्यों की बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। यह बैठक तीन दिन में होने की उम्मीद है। इसके बाद अध्यक्ष द्वारा बीच का रास्ते निकालने के लिए किए जा रहे प्रयास की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की संभावना।
बीएसएफ से सेवानिवृत्त 85 वर्षीय अध्यक्ष डॉ. हसन ने बताया कि वह इस मामले को लेकर गंभीर हैं। पूरी जिंदगी में इतना दर्द उन्हें कभी नहीं हुआ जितना मथुरा के सौहार्र्द बिगड़ने की बात से मन में होता है। वह विद्यालय में हमेशा महाकवि कालिदास को लेकर आयोजन करते हैं। पिछली दफा आयोजन के मुख्य अतिथि गुरु शरणानंदजी महाराज थे। ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष ने जमीन के मालिकाना हक संबंधी सवाल पर बताया कि इस संबंध में वह कमेटी के पदाधिकारी के साथ कलक्ट्रेट पर दो दफा गए थे परंतु संबंधित अधिकारी के न मिलने पर इस पर निर्णय नहीं हो सका। वह ईदगाह कमेटी की बैठक में सदस्यों से इस संबंध में बातचीत करेंगे और बीच का रास्ता निकालने का प्रयास करेंगे।
भूल सुधारने का प्रयास स्वागत योग्य: कपिल शर्मा
अयोध्या के अनुभवों को देखते हम मुस्लिम पक्ष के इस वक्तव्य से आशान्वित नहीं हैं। वहां पर सनातनी महापुरुषों ने मामला कोर्ट के बाहर सुलझाने का अथक प्रयास किया परंतु नतीजा ढाक के तीन पात रहा। फिर भी यदि मुस्लिम पक्ष अपनी भूल सुधारने का प्रयास करता है तो उनका स्वागत किया जाएगा।
पहले शुरू तो करें, फिर पता लगेगा: मनीष यादव
श्रीकृष्ण जन्मस्थान मामले के पक्षकार मनीष यादव ने बताया कि ईदगाह के अध्यक्ष पहले पहल अपने लोगों में शुरू करें। इसके बाद पता लगेगा कि वह कौन सा रास्ता निकालते हैं। हमारे पास तो एक ही रास्ता है कि जो आपने भगवान श्री कृष्ण के जन्मस्थान पर ईदगाह बना रखी है उसको वहां से हटा लें।
रास्ता निकलेगा तो करेंगे स्वागत: महेंद्र प्रताप
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष व केस के पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष अपने बयान के बाद कमेटी की बैठक बुलाएंगे। इसमें यदि कोई बीच का रास्ता निकलता है तो वह इस पहल का स्वागत करेंगे।
न्यायालय की प्रक्रिया तेजी से बढ़ेगी: शैलेश
अवकाश के बाद जैसे ही अदालत खुलेंगी न्यायालय की प्रक्रिया तेज गति से आगे बढ़ेगी। वह भी चाहते हैं कि यदि मुस्लिम पक्ष जमीन से ईदगाह को हटाने को तैयार है तो अच्छी बात होगी।