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मेरे गौरस कौ दान कहां मार के चली...

Thu, 15 Sep 2016 12:34 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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मटकी फोड़ लीला
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परिक्रमा मार्ग स्थित सांकरी खोर में बुधवार को सुबह से ही मटकी फोड़ लीला देखने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। नंदगांव-बरसाना के लोगों के बीच हंसी-ठिठोली का दौर शुरू होते ही उपस्थित जनसमूह सुध-बुध खो बैठा। समाज गायन के दौरान मेरो गौरस कौ दान कहां मार के चली वृषभानु की लली...,  तुम तो मोहन चोर हमेशा के यह धमकी तनिक दिखाय दीजो... आदि पद गाए गए। 
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नंदगांव-बरसाना के गोस्वामीजनों ने समाज गायन, दानलीला और मटकी फोड़ लीला के पद गाए। इसके बाद दो बजे सांकरी खोर में मटकी फोड़ लीला का आयोजन हुआ। सांकरी खोर में द्वापर युग में श्रीकृष्ण और वृषभानु नंदिनी राधा व उनकी सखियों के मध्य दान लीला हुई थी। इसमें राधारानी अपनी सखियों के साथ गांव चिकसौली और मानपुर के घर-घर से माखन बरसाने लेकर आ रहीं थीं।

रास्ते में श्रीकृष्ण अपने ग्वालों के साथ सांकरी गली में पहुंचे और दूध, दही बेचने जा रही सखियों का मार्ग अवरुद्ध करने को खड़े हो गए। लाला ने माखन का दान भानु लली से मांगा और भानु लली ने कहा हम माखन नहीं देंगे। नंदलाला ने लकुटिया उठा कर मटकी पर दे मारी और मटकी फूट गई। यह लीला देखकर चारों तरफ  नन्द के लाला और वृषभानु नंदिनी की जयजयकार होने लगी। दानबिहारी गोस्वामी ने बताया कि नंदगांव और बरसानावासी मटकी फोड़ लीला को करीब 450 वर्षों से जीवंत किए हैं।
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लीला के दौरान मची भगदड़ 
मटकी फोड़ लीला के दौरान दोपहर एक बजे राधाकृष्ण के स्वरूप आने के बाद पहाड़ी पर हलचल मचने लगी। पहाड़ी पर एकत्र जनसमूह लीला को देखने के लिए अपने-अपने स्थान पर बैठे हुए थे। मटकी फोड़ने वाले स्थान पर पुलिस बल मौजूद था।

जैसे ही चिकसौली गांव के लोग मटकी को लेकर सांकरी गली में ऊपर चढ़े, तभी वहां उपस्थित नंदलाला ने गोपियों और राधा की मटकी को फोड़ दिया। मटकी के फूटते ही एकत्र जनसमूह दही प्रसाद के लिए टूट पड़ा। पुलिस कुछ समझ पाती तब तक पीछे से भीड़ का रेला भी उनके ऊपर गिरने लगा। पुलिस ने बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया। तब जाकर लोगों की जान में जान आई। 
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