एक बार फिर मथुरा ने एनसीआर के लिए अपना दावा प्रस्तुत कर दिया है। इसे लेकर लखनऊ में आयोजित हुई बैठक में एमवीडीए सचिव विजय कुमार ने मथुरा को एनसीआर का हिस्सा बनाए जाने के जरूरत गिनाईं।
राज्य सरकार एक बार फिर प्रदेश के कुछ जिलों को एनसीआर से जोड़ने की कवायद कर रही है। इसमें मथुरा, अलीगढ़, शामली, सहारनपुर और मुजफ्फर नगर को शामिल किया गया। इसके संदर्भ में मंगलवार को लखनऊ में बैठक आयोजित हुई। इसमें मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के सचिव विजय कुमार ने मथुरा को एनसीआर का हिस्सा बनाए जाने की जरूरत बताई।
यह तीसरा मौका है जब मथुरा ने एनसीआर के लिए अपना दावा प्रदेश सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया है। इसमें विजय कुमार ने बताया कि मथुरा की दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा दूरी करीब 146 किलोमीटर है। पड़ोसी जनपद भरतपुर मथुरा से दूर होने के बावजूद एनसीआर का हिस्सा बना हुआ है। धार्मिक महत्व के चलते डेवलपमेंट की दृष्टि से मथुरा को एनसीआर में शामिल किए जाने की आवश्यकता है। दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे-टू के साथ यमुना एक्सप्रेसवे भी मथुरा को दिल्ली से जोड़ता है।
गौरतलब रहे कि मथुरा को एनसीआर में शामिल करने की पैरवी लंबे समय से की जा रही है। वर्तमान सांसद हेमामालिनी भी मथुरा को एनसीआर में शामिल कराने की इच्छुक हैं। उन्होंने इसके संदर्भ में भारत सरकार से पत्राचार भी किए हैं।