मथुरा-पलवल रेलमार्ग पर वृंदावन-आझई के बीच मालगाड़ी के 12 कोचों के बेपटरी होने से रेल यातायात भी बेपटरी हो गया। वंदेभारत, गतिमान सहित 5 ट्रेनें निरस्त कर दी गईं तो 19 को रास्ता बदलकर गुजारा गया। हादसे के 24 घंटे बाद भी मुख्य ट्रैक पर संचालन शुरू नहीं हो सका। इससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। तमाम यात्रियों ने आरक्षण निरस्त करवाए। जीएम व डीआरएम ने राहत कार्यों का जायजा लिया। दुर्घटना का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। जांच की जा रही है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार मंगलवार रात 8.03 बजे पर कोयले से लदी मालगाड़ी के 12 डिब्बे पटरी से उतरने के बाद आगरा-दिल्ली रेलमार्ग पर संचालन ठप हो गया था। हादसे की सूचना मिलते ही उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक, डीआरएम समेत करीब 350 अफसर व कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंच गए और रातभर ट्रैक दुरुस्ती और मलबा हटाने का कार्य चलता रहा।
शाम तक मुख्य मार्ग से मालगाड़ी के डिब्बों और कोयला को नहीं हटाया जा सका था। पीआरओ प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि मेन लाइन पर मरम्मत कार्य चल रहा है। बुधवार देर रात तक मुख्य मार्ग को सुचारू करने की उम्मीद है। रेल दुर्घटना की तकनीकी जांच की जा रही है।
दूसरी ओर, गतिमान, शताब्दी, वंदेभारत, ताज एक्सप्रेस, ग्वालियर इंटरसिटी के निरस्त होने के कारण यात्रियों को अपने टिकट कैंसिल कराने पड़े। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इन गाड़ियों के यात्रियों को पूरा रिफंड दिया जाएगा। वहीं अन्य ट्रेनों से सफर करने वाले 500 से ज्यादा यात्रियों ने भी अपने आरक्षण निरस्त करवाए।
दिल्ली से दूरदराज की यात्रा करने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी। त्योहार के कारण ज्यादातर ट्रेनों में सीट नहीं हैं। रूट बदलने के कारण भी यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आगरा, मथुरा छावनी, फरह, मथुरा जंक्शन, छाता, निजामुद्दीन, दिल्ली, झांसी, भोपाल, ग्वालियर तक स्टेशनों पर यात्रियों को घंटों तक ट्रेनों का इंतजार करना पड़ा।
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