मथुरा। प्रेमी के साथ घर से भागने के मामले में लड़की द्वारा स्थानीय अदालत में और हाईकोर्ट में दिए बयानों को नजरअंदाज करना जांच अधिकारी को भारी पड़ गया। उनके द्वारा मुख्य धाराओं में आरोपी की गर्भवती बहन को जेल भेज दिया गया। जिस पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने जांच अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
घटना 17 मार्च 2012 की है। मां ने न्यायालय के माध्यम से थाना शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। उसके द्वारा आरोपी दीपक और बाबूलाल को नामजद कराया। पुलिस ने 22 मार्च को लड़की को आरोपी दीपक की बहन सपना के घर भरतपुर से बरामद किया। जिसके बाद लड़की ने 164 के बयान दिए, जिसमें सपना पर सिर्फ धमकी देने का जिक्र किया। न्यायालय के केस की सुनवाई के दौरान ही लड़की ने अपने बयान बदलते हुए हाईकोर्ट में हैवियस कार्पस लगा दिया और हाईकोर्ट में बयान दिए कि उसके दीपक से प्रेम प्रसंग थे और वह स्वेच्छा से गई थी।
इसके बावजूद भी जांच अधिकारी उपनिरीक्षक गजेंद्र सिंह ने सपना को मुख्य धाराओं का आरोपी बनाते हुए जेल भेज दिया। इस संबंध में सपना ने अदालत के समक्ष प्रार्थनापत्र दिया कि जांच अधिकारी की लापरवाही के चलते उसे तथा गर्भस्थ शिशु को पीड़ा पहुंची है। जिस पर निर्णय करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो द्वितीय अमर सिंह ने जांच अधिकारी के खिलाफ पुलिस महानिदेशक व मुख्य सचिव को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए लिखा है। अदालत के पेशकार राजकुमार ने बताया कि अदालत द्वारा की गई कार्रवाई शासन को भेजी जा रही है।