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मथुरा: 40 हजार रुपये का इनामी चेन स्नेचर मुठभेड़ में घायल, गिरफ्तार

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मथुरा। मुठभेड़ के बाद इनामी बदमाश को ले जाती पुलिस। - फोटो : MATHURA
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मथुरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कृष्णभक्तों के गले से चेन तोड़ने का शातिर चेन स्नेचर पिल्लू का प्लान पुलिस ने धराशायी कर दिया। उससे पहले एसओजी और सर्विलांस ने मांट पुलिस के संग मिलकर मुठभेड़ में ४० हजार रुपये के अंतरजनपदीय को गिरफ्तार कर लिया।
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मांट के राधारानी मंदिर के पीछे हुई मुठभेड़ में शातिर के दाहिने पैर में गोली लगी है। फिलहाल उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। शातिर पर आगरा, मथुरा और हाथरस में करीब ४९ लूट, चोरी, चेन स्नेचर और नकली नोटों के मुकदमे दर्ज हैं।
एसएसपी अभिषेक यादव को सूचना मिली कि शातिर चेन स्नेचर मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं के गले से चेन तोड़ने का ताना-बाना बुन रहा है। एसएसपी ने एसएचओ कोसीकलां अनुज कुमार, एसओजी प्रभारी राकेश यादव, सर्विलांस प्रभारी सोनू कुमार के संग मांट एसएचओ ललित भाटी को टॉस्क दिया।
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एसपी देहात श्रीशचंद ने पत्रकारों को बताया कि टीम ने मिलकर ४० हजार रुपये के इनामी चांद उर्फ पिल्लू पुत्र रमजानी निवासी नई बस्ती डीगगेट, थाना गोविंदनगर को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया है। इसके कब्जे से तमंचा, कारतूस बरामद हुए हैं। इसका एक साथी भाग खड़ा हुआ। जल्द ही इसके गैंग के अन्य सदस्यों को दबोचा जाएगा।
२०१९ में पिल्लू रकाबगंज पुलिस से मुठभेड़ में हुआ था घायल
एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि पिल्लू पर मथुरा में शहर कोतवाली में साल २०२१ में चेन लूट की वारदात को अंजाम दिया। तब से उस पर २५ हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया।
आगरा के थाना रकाबगंज से यह १५ हजार रुपये का इनामी है। इस पर मथुरा में कोतवाली, गोविंदनगर, सदर बाजार, हाईवे और वृंदावन में करीब २३ लूट, चेन स्नेचिंग, अवैध शस्त्र, नकबजनी, मादक पदार्थों की तस्करी, जानलेवा हमला, गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और आगरा के थाना रकाबगंज, सिंकदरा, न्यू आगरा, ताजगंज में करीब २२ मुकदमे और हाथरस में करीब ४ मुकदमे दर्ज हैं। साल २०१९ में थाना रकाबगंज में भी पिल्लू मुठभेड़ में घायल हुआ था। शातिर चेन स्नेचर करीब १५५ चेनों को तोड़ चुका है।
३० प्रतिशत पर रखता नए युवा, ७० प्रतिशत लेता खुद
एसओजी प्रभारी राकेश यादव ने बताया कि शातिर चेन स्नेचर ३० प्रतिशत पर नए युवाओं को अपने गैंग में शामिल करता था। उनसे चेन स्नेचिंग और लूट की वारदात कराता था। लूटे हुए माल से ३० प्रतिशत युवाओं को देता था तो ७० प्रतिशत अपने पास रखता था। इसके गैंग में नए युवा, जो कि जरायम की दुनिया में कदम रखने को बेताब होते थे जुड़ जाते थे।
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