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प्रदूषण से बेदम हो रही कृष्ण की नगरी

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मथुरा। इंडस्ट्री एरिया में चिमनी से उठता हुआ धुआं। - फोटो : MATHURA
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मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी हवा, पानी और मिट्टी दूषित होने की केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट से हड़कंप मच गया है। एक दौर था जब आध्यात्मिक महत्व की इस नगरी में दूध की नदियां बहने की बात कही जाती थी। आज दूध की तो बात दूर ब्रजवासियों को पीने का पानी भी प्रदूषित मिल रहा है।
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हालात यहां तक खराब हैं कि हवा भी दूषित हो चुकी है। पिछले दिनों को वायु प्रदूषण का जो स्तर सामने आया वह दीपावली पर फैले प्रदूषण के आसपास था। जमीनी पानी में फ्लोराइड की मात्रा मानक से बहुत अधिक है। पानी की प्रदूषित होने की रिपोर्ट हर दिन जल निगम के जरिए शासन को भेजी जाती है। इसके बाद भी जमीनी प्रदूषण रोकने के लिए शासन-प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली है। प्रदूषित जल से हो रही सिंचाई व रसायनिक खाद व कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है और सूक्ष्म पोषक तत्व कम हो रहे हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जो रिपोर्ट संज्ञान में आई है वह चिंताजनक है। इस स्थिति की समीक्षा के लिए संबंधित विभागों के साथ बैठक की जाएगी। प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
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- ब्रजेश कुमार, यमुना कार्य योजना के नोडल अधिकारी एवं एडीएम वित्त
प्रदूषण से लोगों का खराब हो रहा स्वास्थ्य
वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और मिट्टी में खराबी के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। हड्डी रोग, श्वांस रोग, चर्म रोग, हृदय रोग समेत वैक्टीरिया से होने वाली बीमारियां बढ़ी है।
- डॉ. शेर सिंह, सीएमओ
प्रदूषण का आकलन किया जाएगा
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट अभी मिली नहीं है। रिपोर्ट मिलने के बाद यहां फैले प्रदूषण का आकलन किया जाएगा। हालांकि समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है और यहां से रिपोर्ट भेजी जाती है।
- डॉ. अरविंद कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
मिट्टी की जांच में पाई जा रही सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी
मथुरा के दो लाख से अधिक किसानों की मिट्टी की जांच कर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए गए हैं। इसमें ज्यादातर जांच राया स्थित शोध केंद्र व आगरा के केंद्रों पर कराई गई हैं। इसमें चौमुहां, छाता, नंदगांव, गोवर्धन, फरह, मांट, मथुरा, राया, बलदेव व नौहझील ब्लाक के किसानों की मिट्टी से जीवाष्म कार्बन की सबसे ज्यादा कमी पाई जा रही है। इसका स्तर एक किलो मिट्टी में आठ ग्राम होना चाहिए, वह घटकर दो ग्राम पर आ गया है। लोह तत्व जो पांच प्रतिशत होने चाहिए, वह घटकर 0.5 प्रतिशत पर हैं। इसी तरह मैग्नीशियम, जिंक, पोटास, व अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की खासी कमी पाई जा रही है।
यमुना से सिंचित फसल में आ रहे सबसे ज्यादा रोग
मथुरा जिले से होकर दो बड़ी प्रमुख नहरें गुजरती हैं। इसमें ओखला से यमुना से निकली अपर आगरा कैनाल नंदगांव, छाता, चौमुहां, गोवर्धन, मथुरा, फरह ब्लाक के गांवों से गुजरती है।
कृषि रक्षा अधिकारी विभाति चतुर्वेदी व उपकृषि निदेशक धुरेंद्र कुमार बताते हैं कि यमुना के प्रदूषित जल से सिंचित खेती में हर साल सबसे ज्यादा रोग फसल में आ रहे हैं। इसमें धान, गेहूं, लाहा में गिड़ार व कीटों के रोग प्रमुख हैं। वहीं दूसरी मांट ब्रांच गंग नहर है। इससे सिंचित फसल में रोग कम देखने को मिल रहे हैं, हालांकि मिट्टी में जीवाश्म तत्वों की खासी कमीं यहां भी है।
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