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क्लोन चेक बनाकर 10 करोड़ ठगने वाले अंतराज्यीय ठग पिता-पुत्र गिरफ्तार

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मथुरा। क्लोन चेक के माध्यम से देश के ५ राज्यों के ४५ लोगों के खाते से ५ करोड़ रुपये निकालने वाले अंतरराज्यीय जालसाज पिता-पुत्र को साइबर सेल ने हाईवे पुलिस की मदद से पकड़ा है। इनके पास से नकदी, चौपहिया वाहन, क्लोन चेक, चेक बुक आदि प्रयोग में आने वाला सामान भी बरामद किया गया है।
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थाना हाईवे पर एसपी सिटी मार्तंड प्रताप सिंह ने बृहस्पतिवार को मीडिया को बताया कि साइबर सेल प्रभारी नितिन कसाना और हाईवे पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में जालसाज अंतरराज्यीय पिता और पुत्र गिरफ्तार किए गए हैं। पकड़े गए विनोद और कंचन सिंह निवासीगण भरतपुर रोड ग्रेटर कैलाश कॉलोनी व बालाजीपुरम एफ-2 मूल निवासी ग्राम गढ़ी केसरी, सादाबाद (हाथरस) हैं।
पिता और पुत्र ने पांच राज्यों में ४५ लोगों को अपना शिकार बनाते हुए करीब पांच करोड़ रुपये की ठगी की संभावना है। क्लोन चेक के माध्यम से लोगों के खाते से यह रकम निकाल लेते थे। मथुरा में इनके खिलाफ कोतवाली में १५ लाख रुपये की गौरव गोयल और थाना हाईवे में कादर बख्श के ६.५० लाख रुपये के जालसाजी के मुकदमे दर्ज हैं। काफी दिनों से इनकी तलाश थी।
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टीम में चौकी प्रभारी पन्नापोखर योगेश कुमार, साइबर सेल आरक्षी विपिन कुमार पाल, विशाल, अनूप कुमार, उदयवीर, अवनीश आरक्षी, चालक विनोद कुमार शामिल थे।
यह है जालसाजी का तरीका
आरोपी बैंक में जाकर लिपिक के पास रखे चेक की वीडियो बनाते थे। उसके बाद इन चेक की वीडियो का स्क्रीनशॉट लेते थे। खाता संख्या और नाम आने के बाद मजदूरों को अपने झांसे में लेकर १० हजार की नौकरी का झांसा देते थे।
मजदूर के आधार कार्ड और अन्य प्रमुख कागजात लेने के बाद यह जालसाज एक बैग, पैन और रजिस्टर देकर इनके नाम से बैंक में खाता खुलवाते थे। उस बैंक की चेक बुक इश्यू कराकर यह जालसाज उसके ऊपर से मजदूर का खाता संख्या और नाम को हटाकर बनाई वीडियो के चेक का नाम और खाता संख्या डालकर हूबहू हस्ताक्षर भी बना लेते थे।
हस्ताक्षर बनाने में दोनों को महारथ हासिल है। इसके बाद चेक लगाकर मजदूर के खाते में रकम को आरटीजीएस करा देते थे। मजदूर के खाते से दूसरे जिले में जाकर रकम को निकाल लेते थे। दोनों जालसाज नए-नए मजदूरों को भी अपना शिकार बनाते थे।
इन राज्यों के लोग हुए जालसाजों का शिकार
- यूपी के मथुरा, आगरा, टूंडला, हाथरस, चित्रकूट, एमपी के मुरैना, भिंड, ग्वालियर, हरियाणा के पलवल, होडल, राजस्थान के अलवर, जयपुर, भरतपुर, उत्तराखंड के देहरादून शामिल हैं।
१९९४ से जालसाजी में उतरा, कई बार गया जेल
साइबर सेल प्रभारी नितिन कसाना ने बताया कि १९९४ में आगरा की नाई की मंडी और आगरा के एत्माद्दौला से जालसाज कंचन सिंह जेल जा चुका है। इसके अलावा १५ साल पहले शहर कोतवाली पुलिस ने भी इसे चेक के मामले में जेल भेजा था।
हालांकि अभी तक पांच राज्यों में इनके जालसाजी का रिकॉर्ड मिला है। इसके अलावा भी अन्य और जिलों में भी आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। फिलहाल पिता-पुत्र जालसाजी का ही कार्य कर रहे थे, पर दिखाने के लिए बिल्डिंग मैटेरियल और पशुओं के चारे का व्यवसाय खोल रखा है। अंडर ट्रेनी सीओ हर्षिता सिंह ने भी इन जालसाजों से जानकारी जुटाई है।
यह हुई बरामदगी
- लैपटॉप-1, प्रिंटर-1, विभिन्न बैंकों के एटीएम कार्ड-19, आधार कार्ड-5, विभिन्न बैंकों की चेकबुक- 30, बैंकों के अधबने चेक व जमा निकासी बाउचर, नए सिम कार्ड-८, विभिन्न कंपनियों के कीपैड फोन-13, मल्टी मीडिया फोन-2, नकदी-5800 रुपये, एक्सयूवी-500, वैगनआर कार, विभिन्न नाम/पदों की मोहर-6।
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