कोसीकलां (मथुरा)। प्रभु राम का राज्याभिषेक देखकर देवता हर्षित हो गए। हर ओर आनंद छा गया। देवता और मुनि जय-जयकार करने लगे। रामलीला संस्थान के तत्वावधान में आयोजित भरतमिलाप मेला संपन्न होने के बाद भगवान राम के राज्याभिषेक की प्रतीकात्मक रस्म की गई। रस्म पूरी होते ही पूरा परिसर रामायण की चौपाई से गुंजायमान हो उठा।
भरतमिलाप चौक पर भगवान राम का राज्याभिषेक मुख्य अतिथि गिर्राज जैन दहगांव वाले ने मेला आचार्य मोरकुकुट शास्त्री के मंत्रोच्चारणों के मध्य किया। राज्याभिषेक होते ही पूरा क्षेत्र रामचंद्र के जयघोषों से गूंज उठा। मुख्य अतिथि लायंस इंटरनेशनल क्लब फाउंडेशन के राष्टीय कोऑर्डिनेटर पीसी जैन ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जीवन दर्शन हम सबके लिए प्रेरणास्रोत है। रामलीला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि भगवान राम के आदर्शों से सीख मिलती है। कहा कि समाज में निरंतर नैतिकता में गिरावट आ रही है इसका एक कारण यह भी है कि हम अपने महापुरुषों के जीवन दर्शन को भूलते जा रहे हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एक आदर्श महापुरुष थे उनके जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
कार्यक्रम में मेला आचार्य मोरमुकुट शास्त्री, लीला निर्देशक सत्यनारायण शर्मा, संयोजक सुभाष बांसईया, अध्यक्ष कमल किशोर वार्ष्णेय, मंत्री अन्नू वैद्य, विजय अगरारिया, अशोक कामियां, सुभाष गोयल, हरिओम गुप्ता, होती चौधरी, धर्मवीर अग्रवाल, तरुण सेठ, दिनेश बठैनिया, प्रमोद बठैनिया, मुकेश जैन, मुकेश गिडोहिया, राजेंद्र रुहेला, अशोक खंडेलवाल, रजनीश खंडेलवाल, एसडीएम हनुमान प्रसाद मौर्य, सीओ वरुण कुमार, इंस्पेक्टर संजय कुमार त्यागी थे। संचालन विनोद जैन ने किया।
प्रथम तिलक वशिष्ठ मुनि कीना, पुनि सब विप्रन्ह आयसु दीन्हा।। सुत बिलोकि हरषीं महतारी। बार-बार आरती उतारी।।
भावार्थ: सबसे पहले मुनि वशिष्ठ ने तिलक किया। फिर उन्होंने सब ब्राह्मणों को तिलक करने की आज्ञा दी। पुत्र श्री राम को राजसिंहासन पर देखकर माताएं हर्षित हुई और बार-बार आरती उतारी।